मेखला गुप्ता
भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था में देवरानी-जेठानी का रिश्ता प्रेम और तकरार का मिश्रण होता है। ऐसे में यदि जेठानी गृहिणी हो और देवरानी नौकरीपेशा या फिर इसके उलट तो यह समीकरण थोड़ा संवेदनशील हो जाता है। दोनों की दिनचर्या, जिम्मेदारियां और अपेक्षाएं अलग-अलग होती हैं, जिससे आपसी तालमेल में खटास आने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। लेकिन थोड़े-से प्रयास से इस रिश्ते को मधुर बनाया जा सकता है।
सम्मान है पहली शर्त
इस स्थिति में जेठानी को समझना चाहिए कि वर्किंग देवरानी की दिनचर्या कठिन है। ऑफिस का तनाव, समय की पाबंदी और कार्य दबाव उसकी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा पर असर डालता है। वहीं, देवरानी को भी समझना चाहिए कि जेठानी दिन भर घर संभालती है, जो एक जिम्मेदार और मेहनत भरा कार्य है। अगर दोनों एक-दूसरे की मेहनत को पहचानें और सम्मान दें तो यकीनन रिश्ते की नींव मजबूत होगी।
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संवाद बनाए रखें
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संवाद बनाए रखें
अक्सर रिश्तों में दरार संवाद की कमी से आती है। अगर देवरानी-जेठानी खुलकर बात करें, विचार साझा करें और समस्याओं पर साथ बैठकर चर्चा करें तो गलत-फहमियों से बचा जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी दिन देवरानी को देर हो जाए तो वह जेठानी को पहले ही सूचित कर सकती है। वहीं, जेठानी भी किसी बात को मन में रखने के बजाय प्यार से स्पष्ट कर सकती है।
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दोनों की साझी योजनाएं
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दोनों की साझी योजनाएं
घर एक साझी जगह है, इसलिए उसकी जिम्मेदारियां भी साझा होनी चाहिए। दोनों आपसी सहमति से घरेलू कार्यों की सूची बना सकती हैं, जिसमें यह तय हो कि कौन किस कार्य को निभाएगा। उदाहरण के लिए, देवरानी सुबह का काम देखे तो जेठानी शाम का खाना बना सकती है। इस तरह आपसी सहयोग से किसी एक पर बोझ नहीं पड़ेगा।
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सप्ताहांत पर साथ-साथ
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सप्ताहांत पर साथ-साथ
वर्किंग महिलाओं के लिए सप्ताह के पांच दिन बेहद व्यस्त रहते हैं। ऐसे में सप्ताहांत पर थोड़ा समय निकाल कर जेठानी को आराम देकर घर के काम करना आपसी रिश्ते में गर्मजोशी का भाव ला सकता है।
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प्रतिस्पर्धा नहीं
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प्रतिस्पर्धा नहीं
देवरानी-जेठानी के रिश्ते में सबसे ज्यादा समस्या तब आती है, जब तुलना शुरू होती है। “वो तो सारा दिन घर पर रहती है फिर भी...” या “ऑफिस का बहाना बना कर घर के काम से बचती है!” जैसे ताने रिश्तों में खटास ला सकते हैं। दोनों को यह समझना चाहिए कि हर व्यक्ति की भूमिका अलग होती है। एक-दूसरे की तुलना करने के बजाय सहयोग करें।