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Health Alert: ऐसे जानें, बढ़ तो नहीं गया है आपका स्क्रीन टाइम? यह आंखों ही नहीं पूरे शरीर के लिए नुकसानदायक

Tue, 04 Jul 2023 07:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 04 Jul 2023 07:36 PM IST
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स्क्रीन टाइम बढ़ने के नुकसान - फोटो : iStock

स्क्रीन टाइम बढ़ने को स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई प्रकार से हमारी सेहत के लिए हानिकारक दुष्प्रभावों वाला मानते हैं। स्क्रीन टाइम बढ़ने का मतलब- मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी जैसी स्क्रीन को देखते समय बिताया जाने वाला अधिक समय होता है। यह न सिर्फ आंखों के लिए नुकसानदायक है साथ ही अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों को स्क्रीन टाइम अधिक है, उनमें मस्तिष्क से संबंधित समस्या, मोटापा और कई तरह की अन्य क्रोनिक बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है।



डॉक्टर कहते हैं, आधुनिक युग में डिजिटल उपकरण हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो गए हैं। जितना अधिक हम अपने आप को स्क्रीन्स के संपर्क में रखते हैं, इससे उतना ही नुकसान होने का खतरा हो सकता है। विशेष चिंता का विषय, बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम है जिससे न सिर्फ उनमें मायोपिया जैसे आंखों की समस्याएं बढ़ी हैं साथ ही इसका मस्तिष्क की सेहत पर भी दुष्प्रभाव देखा जा रहा है। 

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स्क्रीन टाइम और स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Pixabay

स्क्रीन टाइम बढ़ने के कई नुकसान

अमर उजाला से बातचीत में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ विनीत सहगल कहते हैं, वैश्विक स्तर पर बढ़ती आंखों की कई बीमारियों जैसे मायोपिया, ड्राई आइज, विजन सिंड्रोम आदि के लिए स्क्रीन टाइम बढ़ने को प्रमुख जोखिम कारक माना जाता रहा है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी को आंखों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक माना जाता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि स्क्रीन टाइम आंखों की समस्याओं के साथ शारीरिक निष्क्रियता और इसके कारण होने वाले मोटापे, नींद विकार, मस्तिष्क से संबंधी समस्याओं को भी बढ़ा रही है। 

आइए जानते हैं कि कैसे पता कर सकते हैं कि कहीं आपका भी स्क्रीन टाइम बढ़ तो नहीं गया है? अगर ये लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत सावधान हो जाएं।

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मायोपिया की समस्या - फोटो : iStock

आंखों से संबंधित दिक्कतें

स्क्रीन टाइम बढ़ने का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव आंखों की सेहत पर होता है। बच्चों में चश्मा लगने का एक कारण इसे भी माना जाता है। यदि आपको दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई दे रही हैं, स्पष्ट रूप से देखने के लिए पलकों को तिरछा करने या आंखों को हल्का सा बंद करने की जरूरत होती है, अक्सर सिरदर्द या आंख पर जोर महसूस होता रहता है तो आपको तुरंत स्क्रीन्स से दूरी बना लेनी चाहिए। ये मायोपिया के शुरुआती संकेत हो सकते हैं इसका तुरंत उपचार किया जाना चाहिए।

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नींद न आने की समस्या - फोटो : istock

नींद न आने या बार-बार टूटने की समस्या

अध्ययनों से पता चलता है कि स्क्रीन टाइम बढ़ने की स्थिति में आपको नींद न आने की समस्याएं हो सकती हैं। ज्यादा स्क्रीन देखते रहने से नींद के लिए आवश्यक मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे या तो आपको अच्छी नींद नहीं आती या फिर बार-बार नींद टूटने की समस्या हो सकती है। अगर आप भी कुछ दिनों से नींद विकारों का अनुभव कर रहे हैं तो सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद करें। 

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वजन बढ़ने की समस्या - फोटो : iStock

वजन बढ़ने का दिक्कत

स्क्रीन टाइम आपके वजन को बढ़ाने का भी कारण बन सकती है। स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के कारण आपकी शारीरिक निष्क्रियता काफी कम होने लगती है जिससे कैलोरी बर्न कम हो जाती है और वजन बढ़ने लग सकता है। वजन बढ़ने को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदय रोग, डायबिटीज जैसी क्रोनिक बीमारियों को बढ़ाने वाला माना जाता है। बच्चों के अधिक मोबाइल के इस्तेमाल के कारण उनमें यह जोखिम अधिक देखा जा रहा है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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