दिल्ली-एनसीआर के कई स्कूलों में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। एक समय जब ऐसा लगने लगा था कि अब स्थिति सामान्य होने लगी है, इसी बीच नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों का संक्रमित पाया जाना कई स्तर पर मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले तीन दिनों में नोएडा के चार स्कूलों में 23 से ज्यादा बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। ऐसी ही खबरें गाजियाबाद और दिल्ली के कुछ स्कूलों से भी मिल रही हैं। एहतियात के तौर पर कई स्कूलों ने कुछ दिनों की छुट्टी, जबकि कुछ में दोबारा से ऑनलाइन क्लास शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
अलर्ट: स्कूलों में बढ़ते कोरोना के मामले डराने वाले, विशेषज्ञों की सलाह- इन बातों का खास ख्याल रखें माता-पिता
बच्चों में कोरोना संक्रमण का जोखिम
संक्रमण के जोखिमों के बारे में अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने बच्चों में कोविड-19 के जोखिम को लेकर बड़ा दावा किया है। जामा पीडियाट्रिक्स जर्नल में प्रकाशित एक शोध में विशेषज्ञों ने बताया कि 5 साल से कम आयु वाले बच्चों में डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन से संक्रमण की स्थिति में गंभीरता का खतरा कम पाया गया है। बच्चे अगर संक्रमित हो भी जाते हैं तो इनमें रोग की गंभीरता का जोखिम कम देखा गया है। हालांकि, बच्चे संक्रमण का वाहक हो सकते हैं, ऐसे में माता-पिता को इनकी सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
बच्चों को सिखाएं संक्रमण से बचाव के तरीके
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह हर माता-पिता की विशेष जिम्मेदारी है कि इस समय वह स्कूल भेजते समय बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाव के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दें। स्कूल में मास्क कैसे पहनना है, सोशल डिस्टेंसिंग, हाथों की साफ-सफाई की जरूरत और फायदों के बारे में बच्चों को जरूर सिखाया जाना चाहिए। स्कूल प्रशासन भी सुनिश्चित करे कि बच्चों के बीच आपसी दूरी बनी रहे और किसी भी तरह से कोरोना के संभावित खतरों से बचाव किया जा सके।
लक्षण हैं तो न भेजें स्कूल
विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि आपके बच्चे में सर्दी-खांसी, बुखार या कोरोना संक्रमण के कोई भी संभावित लक्षण हैं तो उन्हें स्कूल न भेजें। लगातार लक्षणों की बारीकी से निगरानी करते रहें, अगर समस्या बढ़ रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए यह कदम बहुत आवश्यक है। चूंकि बच्चे स्वयं से ख्याल नहीं रख पाते हैं, ऐसे में मास्क और हाथों की स्वच्छता को लेकर विशेष जागरूकता दिखाने की आवश्यकता है।
इन स्थितियों में रहे विशेष सावधान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन बच्चों को पहले से ही अस्थमा, सांस की दिक्कत या कमजोर इम्युनिटी की दिक्कत है, उन्हें कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच स्कूल न भेजें। ऐसे बच्चों में संक्रमण का खतरा अन्य की तुलना में अधिक हो सकता है। इसके अलावा ये स्वास्थ्य स्थितियां रोग की गंभीरता का भी कारण बन सकती हैं, ऐसे में इन बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता को खासा ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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