Medically Reviewed by Dr. Ashish Sabwani
डॉ आशीष साबवानी
चर्म रोग विशेषज्ञ, रेडिएंट स्किन क्लिनिक, लखनऊ
डिग्री- एमबीबीएस, एमडी- डर्मेटोलॉजी
अनुभव- 7 वर्ष
दिल्ली में रहने वाले आकाश को पूरी रातभर नींद नहीं आती है और यदि नींद आ भी जाती है तो पूरी रात उस एंबुलेंस के साइरन की आवाजें सुनाई देती हैं जबकि उसके आसपास पूरी शांति पसरी रहती है। भोपाल में रहने वाली 28 वर्षीय अंकिता को बार-बार लगता है कि उसे कोरोना हो जाएगा और उसे यदि कोरोना हुआ तो घर में पिता, जो कि कैंसर के मरीज हैं, उनकी जान जोखिम में आ जाएगी। कोरोनाकाल ने दुनियाभर में लोगों को मानसिक रूप से अस्वस्थ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कोरोना की दूसरी लहर में मौतों के बढ़े आंकड़ों के कारण तनाव और अवसाद से पीड़ित लोगोंं की संख्या में भी अचानक से उछाल आया है। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का यह प्रभाव काम, परिवार , शरीर, जीवन सभी पर पड़ता है। चिकित्सक के अनुसार, लोगों में कोरोना से अधिक तो भय का संक्रमण हुआ है। आइए जानते हैं तनाव से होने वाले भय के संक्रमण के प्रकार।
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कोरोना के दूसरे चरण में देखा गया है
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मृत्यु का डर
बेंगलुरु में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस के अनुसार, कठिन परिस्थिति में दोस्तों और परिवार से दूर मृत्यु को प्राप्त होने का डर कई सारे लोगों में महामारी के दौरान पाया गया। यह डर महामारी के पहले चरण में इतना नहीं था जितना कि इसे अभी पिछले महीनों में कोरोना के दूसरे चरण में देखा गया है। मनोचिकित्सक के अनुसार अटैक से होने वाली अकाल मृत्यु और ब्लैक फंगस जैसी बीमारियों का भी इस डर के उपजने में बहुत हद तक योगदान है।
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भय उनपर हावी होने लगा है
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परिवार को खोने का डर
युवाओं में मनोचिकित्सकों ने यह डर अधिक देखा है। युवा जानते हैं कि वे स्वस्थ हैं लेकिन वे घर के अन्य सदस्यों के प्रति इतना तनाव पाल रहे हैं कि यह भय उनपर हावी होने लगा है। पिछले दिनों लोगों ने देखा कि किस तरह से कोरोना ने उनसे अचानक ही उनके परिवार के सदस्यों को छीन लिया है इसलिए कई लोगों में इस तरह का डर बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
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खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं
- फोटो : सोशल मीडिया
अकेले रहने का डर
अकेले रह जाने का डर सबसे खराब है। विशेषज्ञ के अनुसार, इस तरह का भय पालने वाले अधिकांश लोग अपने आसपास लोगों के होने के बावजूद भी खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। कई बार वे अजीबोगरीब परिस्थितियों का मस्तिष्क में निर्माण कर लेते हैं और उसमें खुद को अकेला फंसा हुआ पाते हैं, इसी के इर्द-गिर्द वे पूरा दिन घूमते रहते हैं। जिससे कि तनाव और भी बढ़ जाता है। महिलाएं पिछले दिनों इस तरह के डर से बहुत ज्यादा ग्रसित नजर आ रही हैं। उन्हें अकेले रहने का डर बहुत अधिक सताता है।
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खुद को असफल मानने की गलती भी कर रहे हैं
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भविष्य का डर
अधिकांश लोग भविष्य को लेकर बहुत अधिक चिंता कर रहे हैं क्योंकि उन्हें प्रतिक्षण यह डर सताता रहता है कि कब उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ जाए, विद्यार्थियों को परीक्षाएं देने को नहीं मिल रही है, इस कारण वे भी भविष्य को लेकर कुछ सोच नहीं पा रहे हैं। ऐसे लोग खुद को असफल मानने की गलती भी कर रहे हैं। भविष्य को लेकर अनिश्चितताएं इंसान को तनावग्रस्त तो बना ही रही है, साथ ही लोग चिढ़चिढ़े भी हो रहे हैं।
नोट- यह लेखरेडिएंट स्किन क्लीनिक के डॉ आशीष साबवानी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर आशीष साबवानी पिछले सात सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्रियां केजीएमसी लखनऊ एवं एमयूएचएस नासिक से ली है।
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