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सेहत की बात: क्या आपके बच्चे की त्वचा भी पड़ रही है पीली? ये कब खतरे का संकेत, यहां जानिए

Mon, 21 Sep 2026 06:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 21 Sep 2026 06:24 PM IST
सार

नवजात बच्चों में पीलिया आम है और ज्यादातर मामलों में खुद ठीक हो जाता है। लेकिन जन्म के पहले 24 घंटे में पीलिया, तेजी से बढ़ता पीलापन, दूध न पीना, अत्यधिक सुस्ती या सांस की परेशानी खतरे के संकेत हो सकते हैं। बिलीरुबिन की जांच से स्थिति का पता लगाया जाता है।

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Newborn Jaundice Causes, Warning Signs and Care baccho me pilia kyu hoti hai
बच्चों में पीलिया की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

क्या आपके बच्चे की आंखों और त्वचा का रंग पीला दिख रहा है? अगर हां, तो सावधान हो जाइए, त्वचा में ये छोटा सा बदलाव कई बार गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।



नवजात बच्चों में ये समस्या और भी चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है। जन्म के बाद कई बच्चे इसका शिकार हो जाते हैं। हालांकि अगर ये दिक्कत लगातार बनी रहती है और इलाज के बाद भी बार-बार वापस आ जा  रही है तो सावधान हो जाना चाहिए। पीलिया को आमतौर पर लिवर की बीमारियों का संकेत माना जाता है, ऐसे में बार-बार पीलिया होने का मतलब है कि बच्चे में लिवर की कोई समस्या हो सकती है।

आइए जानते हैं कि बच्चों में पीलिया की दिक्कत होती क्यों है और इससे बचाव के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?

Newborn Jaundice Causes, Warning Signs and Care baccho me pilia kyu hoti hai
बच्चों की सेहत - फोटो : Freepik.com

नवजात बच्चों में पीलिया की दिक्कत

नवजात बच्चे की त्वचा या आंखों का सफेद हिस्सा पीला दिखाई दे तो माता-पिता घबरा जाते हैं। हालांकि डॉक्टर बताते हैं कि नवजात बच्चों में पीलिया काफी आम है और ज्यादातर मामलों में यह गंभीर बीमारी नहीं होती। जन्म के शुरुआती दिनों में बच्चे के शरीर में बिलीरुबिन नाम का पीला पदार्थ बढ़ने के कारण त्वचा और आंखों में पीलापन दिखाई दे सकता है।
 

  • जन्म के बाद लाल रक्त कोशिकाओं में ब्रेकडाउन होता है और उनसे बिलीरुबिन बनता है। 
  • नवजात का लिवर शुरुआती दिनों में इसे पूरी तरह बाहर निकालने के लिए तैयार नहीं होता, इसलिए खून में बिलीरुबिन बढ़ने लगता है। 
  • आमतौर पर पीलिया की समस्या जन्म के दूसरे-तीसरे दिन ज्यादा दिखाई देती है और आमतौर पर कुछ दिनों में अपने आप या फिर हल्के-फुल्के उपचार से ठीक भी हो जाती है।
Newborn Jaundice Causes, Warning Signs and Care baccho me pilia kyu hoti hai
बच्चों में पीलिया की समस्या और खतरे - फोटो : Freepik.com

पीलिया कब खतरे का संकेत?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जन्म के 24 घंटे के भीतर पीलिया के लक्षण दिखना समस्या का संकेत हो सकता है। अगर बच्चे की त्वचा पर पीलापन बढ़ता जा रहा हो, बच्चा  ठीक से दूध नहीं पी रहा है, सामान्य से ज्यादा सुस्त हो जाए तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। 
 

  • बिलीरुबिन की अधिकता कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है और दुर्लभ मामलों में इससे नवजात के दिमाग को नुकसान भी पहुंचा सकता है। 
  • इसलिए सिर्फ त्वचा देखकर यह तय नहीं करना चाहिए कि पीलिया हल्का है या गंभीर। बिलीरुबिन की सही जांच जरूरी है।
  • जन्म के बाद आमतौर पर नवजात विशेषज्ञों की निगरानी में रहते हैं जहां उनकी सेहत पर डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी बनाए रहती है।
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बच्चों की सेहत का रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com

बच्चे को पीलिया है तो क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नवजात को मां की दूध पिलाना जरूरी है। आमतौर पर नियमित फीडिंग, करीब 8 से 12 बार प्रतिदिन, बच्चे को पर्याप्त पोषण और तरल देने में मदद करती है। अगर पीलिया ज्यादा हो तो डॉक्टर बिलीरुबिन के स्तर और बच्चे की उम्र के हिसाब से इलाज तय करते हैं।
 

  • जरूरत पड़ने पर फोटोथेरेपी की जाती है, जिसमें विशेष रोशनी की मदद से बिलीरुबिन को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है। 
  • गंभीर और दुर्लभ मामलों में अस्पताल में रक्त चढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है। 
  • बच्चे को घर पर पीलिया हो जाए तो खुद से कोई इलाज या घरेलू उपाय न करें। ये बीमारी को और बिगाड़ सकती है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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