मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में लगभग हर 7 में से 1 व्यक्ति (करीब 1.2 अरब लोग) किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है, जिनमें एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामले सबसे आम हैं। आंकड़े बताते हैं कि ये समस्याएं सिर्फ वयस्कों और कामकाजी वर्ग के लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि कम उम्र वाले यहां तक कि छात्रों में भी बढ़ती जा रही है।
जेन-जी मेंटल हेल्थ: बाहर से कूल पर अंदर से परेशान, स्ट्रेस-एंग्जाइटी होने के बावजूद नहीं लेते डॉक्टरी मदद
युवाओं में भावनात्मक तनाव और मानसिक परेशानी को लेकर चुप्पी एक गंभीर चिंता का विषय है। आमतौर पर इसके लिए सामाजिक कलंक के भाव को सबसे बड़ी वजह के रूप में देखा जाता है। जिस जेन-जी पीढ़ी को काफी एक्सप्रेसिव माना जाता रहा है वह मेंटल हेल्थ की समस्याओं पर खुल कर बात करने और मदद मांगने में अब भी हिचकिचा रही है।
युवा पीढ़ी में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा
हाल ही में एम्पॉवर के एक सर्वे में विशेषज्ञों ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बावजूद बड़ी संख्या में देश के जेन-जी (13 से 29 वर्ष की आयु वाले) अब भी भावनात्मक चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
- सर्वे के मुताबिक, इस आयुवर्ग के देश के लगभग 50 फीसदी युवा अपनी मुश्किल भावनाओं को खुद ही संभालने की कोशिश करते हैं। केवल 9-10% युवा ही पेशेवर मदद के लिए जाते हैं।
- करीब 40.9% युवाओं ने माना कि अंदर से परेशान होने के बावजूद वे ऐसा दिखाने को मजबूर होते हैं कि सबकुछ ठीक हैं।
- भावनाओं पर बात करने के बजाय खुद को लगातार व्यस्त रखते हैं, ताकि परेशान करने वाले विचारों के बारे में सोचने का समय ही न मिले।
- केवल 13.6% बताया कि किसी ने बिना जज किए उनकी बात सुनी और उनका साथ दिया।
सर्वे में क्या पता चला?
मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु सहित देश के 10 प्रमुख क्षेत्रों में जेन-जी (18 से 25 साल की उम्र के युवाओं) के बीच ये सर्वे किया गया। विशेषज्ञों ने समझने की कोशिश की कि भावनात्मक तनाव से गुजरते समय युवा किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और मदद मांगने को लेकर उनका रवैया कैसा है? सर्वे में सामने आया कि मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत बढ़ने के बावजूद कई युवा अपनी परेशानी छिपाते हैं।
- एम्पॉवर के चीफ मेडिकल एडवाइजर डॉ. जोरिक मार्कर के मुताबिक, मानसिक स्वास्थ्य को केवल डिप्रेशन या एंग्जायटी जैसी बीमारियों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह इस बात से भी जुड़ा है कि व्यक्ति अपने विचारों, रिश्तों और मुश्किल भावनाओं को किस तरह संभालता है?
- जब युवाओं को बार-बार मजबूत बनो, काम पर ध्यान दो जैसी बातें सुनने को मिलती हैं, तो उनकी वास्तविक परेशानी और भावनात्मक दर्द को समझने के बजाय उसे दबा दिया जाता है।
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?
अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, बाहर से सब ठीक दिखने का मतलब ये नहीं है कि व्यक्ति अंदर से भी ठीक हो। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के दौरान कई बार देखने को मिलता है कि मरीज काम कर रहे होते है, पढ़ाई चल रही होती है, दोस्तों से बातचीत भी हो रही है, फिर भी दिल और दिमाग में चल रही उथल-पुथल किसी से कहने का मन नहीं करता।
युवाओं में भावनात्मक तनाव और मानसिक परेशानी को लेकर चुप्पी एक गंभीर चिंता का विषय है। आमतौर पर इसके लिए सामाजिक कलंक के भाव को सबसे बड़ी वजह के रूप में देखा जाता है। मरीजों को डर रहता है कि डॉक्टर के पास गए तो लोग क्या सोचेंगे, ये पागल हो गया है?
जबकि असलियत ये है कि बीमारी को छिपाना, आपके लिए समस्याओं को हर दिन के साथ और बढ़ाता जाता है। जिस स्ट्रेस-एंग्जाइटी को समय रहते ध्यान देकर ठीक किया जा सकता था, उसे लंबे समय तक छिपाए रहना कई बार डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्या के रूप में सामने आता है।
डॉक्टरों की जगह एआई से लेते हैं मदद
एक रिपोर्ट में हमने बताया कि मेंटल हेल्थ की समस्या में मदद के लिए चोरी-छिपे युवा एआई का सहारा ले रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट मानसिक तनाव, अकेलेपन और भावनात्मक परेशानियों में लोगों को तुरंत बातचीत का विकल्प दे रहे हैं। चूंकि परेशान लोगों की बात एआई सुनता हुआ लगता है, जवाब देता है तो ये थोड़ा अच्छा महसूस करा सकता है।
पर विशेषज्ञ कहते हैं, किसी भी स्वास्थ्य समस्या के निदान के लिए मरीज की हिस्ट्री, लाइफस्टाइल, खान-पान की आदत जैसे पहलुओं को समझना ज्यादा जरूरी है, जो एआई चैटबॉट नहीं करते हैं, वो बस सीधा जवाब देते हैं। इतना ही नहीं कई मामलों में एआई की मदद लेना डिप्रेशन जैसे गंभीर मामलों में आत्महत्या के विचारों को बढ़ाने वाला भी हो सकता है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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