डायबिटीज, वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसका जोखिम सभी उम्र के लोगों में बढ़ता जा रहा है। आनुवांशिकता के साथ लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी को डायबिटीज के जोखिमों को बढ़ाने वाला माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मधुमेह के कई जोखिम कारक हो सकते हैं, तनाव की समस्या भी इसमें से एक है। यानी कि अगर आप अधिक तनाव लेते हैं तो इसके कारण भी डायबिटीज होने का खतरा अधिक हो सकता है।
Diabetes: ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं तो हो सकते हैं डायबिटीज के शिकार, जानिए क्या है इन दोनों बीमारियों का संबंध
तनाव और डायबिटीज की समस्या
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि मधुमेह और तनाव का पारस्परिक संबंध हो सकता है, इतना ही अगर आप अधिक तनाव में रहते हैं तो इसके कारण डायबिटीज को कंट्रोल कर पाना भी कठिन हो सकता है। तनाव की स्थिति में कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज होता है जो ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाने वाली हो सकती है। इसके अलावा तनाव की स्थिति में इम्युनिटी सिस्टम भी कमजोर हो जाती है, जिसके कारण डायबिटीज की जटिलताओं के विकसित होने का जोखिम भी अधिक हो सकता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि तनाव की समस्या लोगों को कई तरह से प्रभावित कर सकती है। जब टाइप-2 डायबिटीज वाले लोग मानसिक तनाव में होते हैं, तो वे आम तौर पर अपने रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि का अनुभव करते हैं। साल 2010 में अध्ययनों की समीक्षा में बताया गया है कि जो लोग अवसाद, चिंता, तनाव जैसी समस्याओं के शिकार रहे हैं और इसका समय रहते उपचार नहीं हो रहा है उनमें मधुमेह विकसित होने का खतरा अधिक होता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
नीदरलैंड में एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने समझने के लिए शोध किया कि विभिन्न प्रकार के तनाव कैसे मधुमेह को जन्म दे सकते हैं? इनमें जीवनशैली कारक, हार्मोन के स्तर पर प्रभाव और प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रभाव भी शामिल हैं। तनाव का उच्च स्तर अस्वास्थ्यकर जीवनशैली की आदतों को बढ़ाने वाला हो सकता है और जीवनशैली की गड़बड़ आदतों को मधुमेह के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक पाया गया है।
इसके अलावा तनाव की स्थिति हाइपोथैलेमिक पिट्यूटरी एड्रेनल ग्रंथि ग्रंथि को अति सक्रिय कर देती है इससे हार्मोनल परिवर्तन होने का खतरा भी बढ़ जाता है। जैसे हाई कोर्टिसोल स्तर होने की स्थिति को डायबिटीज के खतरे को बढ़ाने वाला पाया गया है।
तनाव को कंट्रोल करना बहुत आवश्यक
डॉक्टर कहते हैं, तनाव की स्थिति को प्रबंधित करने के तरीकों को पालन में लाकर मधुमेह के रोगी अपने रक्त शर्करा में सुधार कर सकते हैं। नियमित व्यायाम, माइंडफुलनेस, शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर स्ट्रेस की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है। नींद की गुणवत्ता को बढ़ाने से मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन संवेदनशीलता दोनों में सुधार होता है जो मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को कंट्रोल करने में भी लाभकारी हो सकती है।
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स्रोत और संदर्भ
Does Emotional Stress Cause Type 2 Diabetes Mellitus? A Review from the European Depression in Diabetes (EDID) Research Consortium
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