डॉ उत्कर्ष वी अग्रवाल,
कोरोना की इस विपरीत परिस्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह से प्रभावित किया है। कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामलों के चलते अस्पतालों के बेड तेजी से भरते जा रहे हैं। इस स्थिति के चलते न सिर्फ कोरोना के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है, साथ ही अन्य दूसरी गंभीर बीमारियों के शिकार लोगों को भी लंबे समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है। साल भर से अधिक समय से डायबिटीज, कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं से पीड़ित रोगियों पर विशेष ध्यान नहीं दिया जा सका है़, जिससे उनकी स्थिति बिगड़ती जा रही है।
आइए विशेषज्ञों से जानते हैं, कोरोना के समय में डायबिटीज और कैंसर रोगियों का ख्याल कैसे रखा जा सकता है?
विशेषज्ञ से जानें: कोरोना के समय में डायबिटीज और कैंसर रोगी कैसे रखें अपना ख्याल?
डायबिटीज रोगी कैसे रखें अपना ध्यान
उजाला सिग्नस के मेडिकल डायरेक्टर डॉ उत्कर्ष वी अग्रवाल बताते हैं कि कोरोना के समय में डायबिटीज जैसे रोगियों को विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। इस समय में डायबिटीज रोगियों के शुगर के स्तर को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि आप इंसुलिन ले रहे हैं तो नियमित तौर से लेते रहें। डायबिटीज रोगियों खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए, इम्यूनिटी बूस्टरों का सेवन करते रहें।
कैंसर रोगियों को विशेष ध्यान देने की जरूरत
डॉ उत्कर्ष वी अग्रवाल बताते हैं कि पिछले एक साल के दौरान कैंसर के मरीजों को इलाज कराने में ज्यादा दिक्कत हुई है। लोगों के मन में तमाम तरह के डर हैं, लेकिन हमें इस बात का ध्यान रखना है कि किसी भी स्थिति में ऐसे गंभीर रोगों से पीड़ित लोगों को इलाज मुहैया कराई जाए। चूंकि ऐसे रोगियों को नियमित रूप से डॉक्टरी देखभाल की जरूरत होती है ऐसे में इनका इलाज बेहद जरूरी हो जाता है।
कैंसर के जो रोगी कीमोथेरपी पर हैं उन्हें समय पर कीमोथेरपी जरूर कराना चाहिए, इसमें देरी करना सही नहीं है। अगर आप कैंसर के शुरुआती स्थिति में हैं तो फोन से ही डॉक्टर के संपर्क में रहते हुए समय-समय पर बताई गई दवाओं को लेते रहें। कोरोना के समय में ऐसे रोगियों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है।
टीकाकरण सभी के लिए जरूरी
डॉक्टरों के मुताबिक टीकाकरण सभी के लिए आवश्यक है। जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है उन्हें भी टीकाकरण जरूर कराना चाहिए। इसके अलावा टीकारकरण के बाद भी सभी नियमों का पालन करते रहना चाहिए। टीकाकरण कराने से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। इसके बाद संक्रमण के लक्षण और इससे होने वाली दिक्कतें कम होती हैं।
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नोट: यह लेख उजाला सिग्नस के निदेशक डॉ उत्कर्ष वी अग्रवाल से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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