स्वस्थ जीवन के लिए पौष्टिक आहार का सेवन करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। हमारे खाने-पीने की आदतें और तरीके सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक स्वस्थ रहने के लिए भोजन का जितना पौष्टिक होना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है भोजन का सही तरीके से सेवन करना। इसी को लेकर हाल ही में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने खाने के गलत तरीकों को बच्चों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक बताया है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि जो बच्चे बहुत तेजी से और जल्दबाजी में भोजन करते हैं, उनमें अन्य बच्चों की तुलना में मोटापे का खतरा अधिक हो सकता है। बच्चों के खाने की आदतें उनके व्यवहार पर भी असर डाल सकती हैं, इन विषयों पर माता-पिता को विशेष ध्यान देना चाहिए।
अध्ययन: तेजी से खाना खाने वाले बच्चे हो सकते हैं मोटापे के शिकार, इन रोगों का खतरा भी अधिक
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खाने की आदतें और मानसिक सेहत
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जो बच्चे भोजन के संकेतों (खाना देखते या उसकी खुशबू मिलते ही खाने की इच्छा होना) के प्रति अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होते हैं, ऐसे बच्चों को भविष्य में बेचैनी और निराशा महसूस होने का खतरा अधिक हो सकता है। यूबी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन में प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक प्रोफेसर माइल्स फेथ कहते हैं, यह अध्ययन इसलिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें हमें यह जानने के मिला है कि तेजी से खाने की आदतें और खाद्य संकेतों के प्रति अधिक प्रतिक्रियाशील बच्चों में मोटापे का जोखिम अधिक हो सकता है।
खाने की आदतों का स्वभाव पर असर
शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए 28 प्रतिभागियों का सर्वेक्षण किया। 4-8 साल की उम्र वाले इन बच्चों की खाने की गति को कम करने पर जोर दिया गया। इसके साथ अध्ययन में खाने से संबंधित तीन आदतों और उसके बच्चों के स्वभाव पर प्रभाव की भी जांच की गई। अध्ययन के निष्कर्ष में पाया गया कि जो बच्चे पेट भरने के बाद अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं उनका आत्म नियंत्रण अच्छा माना जा सकता है। वहीं जिन बच्चों में जल्दी-जल्दी खाने की आदत है उनमें असंतोष की भावना अधिक हो सकती है। इसके अलावा ऐसे बच्चों के कम उम्र में मोटापा का शिकार होने का खतरा अधिक रहता है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता
जैकब्स स्कूल ऑफ मेडिसिन एंड बायोमेडिकल साइंसेज में बाल रोग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर बटन कहते हैं, बच्चों के व्यवहार और स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए माता-पिता को उनके भोजन और भोजन करने के तरीके दोनों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। मनमौजी बच्चों को शांत करने और बच्चों में नकारात्मक भावनाओं को कम करने के लिए लिए माता-पिता बच्चों के भोजन में सुधार करके लाभ पा सकते हैं। बटन कहते हैं, भविष्य में खाने की आदतों का सेहत पर क्या असर हो सकता है, इसे जानने के लिए और विस्तार से अध्ययन की आवश्यकता है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष
शोधकर्ताओं का कहना है, इस अध्ययन के दौरान बच्चों के खान-पान की आदतों का उनके सेहत और व्यवहार पर क्या असर पड़ सकता है, इसे जानने की कोशिश की गई। हालांकि अभी भी कई सवाल है, जिनके उत्तर मिलने शेष हैं। भविष्य में इसपर और विस्तार से अध्ययन की आवश्यकता है। फिलहाल इस अध्ययन से यह जरूर साबित होता है कि खाने की आदतें शरीरिक और मानसिक सेहत को कई तरह से प्रभावित कर सकती हैं। विशेषकर बच्चों में शुरुआत से ही इन चीजों का ध्यान देकर कई सारी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
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स्रोत और संदर्भ:
Faster eating linked to obesity risk in children
अस्वीकरण नोट: यह लेख 'पीडियाट्रिक ओबेसिटी' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें।