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Covid Variant Pirola: 30 से अधिक म्यूटेशन वाला ये वैरिएंट बना मुसीबत, क्या फिर से मास्क पहनना होगा जरूरी?

Fri, 01 Sep 2023 12:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 01 Sep 2023 12:03 PM IST
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Emerging COVID Variant BA.2.86 Pirola, symptoms of Pirola and how to prevent infection
कोरोना के नए वैरिएंट्स का खतरा - फोटो : Pixabay

कोरोना के नए वैरिएंट्स वैज्ञानिकों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। एरिस (EG.5) और पिरोला (BA.2.86) जैसे ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट्स की प्रकृति को लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं। अध्ययनों में इन वैरिएंट्स में अधिक म्यूटेशनों के बारे में पता चला है जो इसकी संक्रामकता दर और वैक्सीन को चकमा देने वाली क्षमता को बढ़ाने वाली मानी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पिरोला में 30 से अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं, जो काफी चिंता कारक हो सकते हैं। 



हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिरोला अब तक बहुत कम समय में ही यूके, यूएस, इजराइल, डेनमार्क, दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों में पहुंच चुका है। वैज्ञानिक कहते हैं, नए वैरिएंट्स को लेकर एक बात और गौर करने वाली ये भी है कि इन नए वैरिएंट्स के कारण दुनिया भर में मामले सिर्फ एक हफ्ते में दोगुने हो गए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अधिक म्यूटेशंस वाले ये वैरिएंट वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम हैं, इसको लेकर सभी देशों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

Emerging COVID Variant BA.2.86 Pirola, symptoms of Pirola and how to prevent infection
कोरोना का नया वैरिएंट पिरोला - फोटो : Istock

नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर हो सकती है अधिक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नए वैरिएंट्स के बारे में अब तक कोई पुख्ता दावा करने के लिए पर्याप्त अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन प्रारंभिक शोध में पाया गया है कि यह कोरोना के वर्तमान के वैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामकता वाले हो सकते हैं। पिरोला भी ओमिक्रॉन का ही एक रूप है जिससे निकला एक अन्य सब-वैरिएंट EG.5.1 पहले भी देखा जा चुका है।

वैज्ञानिक कहते हैं, जिस प्रकार की ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की प्रकृति रही है, उसे देखते हुए फिलहाल इस बात की चिंता कम ही है कि ये नए सब-वैरिएंट्स किसी गंभीर रोग का कारण बनेंगे, हालांकि इससे बचाव के लिए प्रयास करना बहुत आवश्यक है। 

Emerging COVID Variant BA.2.86 Pirola, symptoms of Pirola and how to prevent infection
नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर अधिक - फोटो : PTI

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

येल मेडिसिन में संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ स्कॉट रॉबर्ट्स ने एक मेडिकल रिपोर्ट में बताया कि, इन नए वैरिएंट्स में म्यूटेशंस की इतनी अधिक संख्या उल्लेखनीय है, डेल्टा के शुरुआती वैरिएंट्स में भी इसी प्रकार के म्यूटेशंस की संख्या देखी गई थी। 

यहां जानना जरूरी है कि वैरिएंट में म्यूटेशंस का मतलब ये पहले वाले वैरिएंट की तुलना में प्रकृति में भिन्न हो सकते हैं। इसके अलावा म्यूटेशनों के बढ़ने के कारण इसके वैक्सीन और पिछले संक्रमणों से शरीर में बनी प्रतिरक्षा को चकमा देने की क्षमता भी काफी बढ़ जाती है। 

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Emerging COVID Variant BA.2.86 Pirola, symptoms of Pirola and how to prevent infection
कोरोना का नया वैरिएंट खतरनाक - फोटो : iStock

पिरोला के लक्षण क्या हैं और क्या यह अधिक घातक है?

प्रारंभिक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आमतौर पर BA.2.86 संक्रमित व्यक्तियों में बुखार और सामान्य सर्दी-फ्लू जैसी बीमारी के ही लक्षण देखे जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोगों में खांसी, थकान, सिर और शरीर में दर्द, भूख न लगने, कंजंक्टिवाइटिस, शरीर पर चकत्ते होने, दस्त और सांस लेने में कठिनाई की भी समस्या देखी जा रही है।

यह स्पष्ट नहीं है कि क्या पिरोला अन्य प्रकारों की तुलना में अधिक गंभीर है। हालाँकि, रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) का मानना है कि BA.2.86 वैरिएंट से टीकाकरण वाले लोगों के भी संक्रमित होने का खतरा हो सकता है।

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कोरोना से बचाव के लिए करें उपाय - फोटो : Pixabay

क्या फिर से मास्क की पड़ेगी जरूरत?

नए वैरिएंट्स के बढ़ते संक्रमण के मामलों और इसकी प्रकृति को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन देशों में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, वहां सभी लोगों को कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर को लेकर गंभीरता बरतने की आवश्यकता है। इसके अलावा चूंकि संक्रमण के मामले पिछले एक महीने के भीतर तेजी से कई देशों में बढ़े हैं, इसको देखते हुए सभी स्थानों पर बचाव के लिए प्रयास करते रहने की आवश्यकता है। अमेरिका के कुछ स्टेट्स में लोगों से फिर से मास्क लगाने की सिफारिश भी की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह अनिवार्यता नहीं है, लेकिन कोरोना से बचाव के लिए कारगर तरीका जरूर हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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