कोरोना के नए वैरिएंट्स वैज्ञानिकों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। एरिस (EG.5) और पिरोला (BA.2.86) जैसे ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट्स की प्रकृति को लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं। अध्ययनों में इन वैरिएंट्स में अधिक म्यूटेशनों के बारे में पता चला है जो इसकी संक्रामकता दर और वैक्सीन को चकमा देने वाली क्षमता को बढ़ाने वाली मानी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पिरोला में 30 से अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं, जो काफी चिंता कारक हो सकते हैं।
Covid Variant Pirola: 30 से अधिक म्यूटेशन वाला ये वैरिएंट बना मुसीबत, क्या फिर से मास्क पहनना होगा जरूरी?
नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर हो सकती है अधिक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नए वैरिएंट्स के बारे में अब तक कोई पुख्ता दावा करने के लिए पर्याप्त अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन प्रारंभिक शोध में पाया गया है कि यह कोरोना के वर्तमान के वैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामकता वाले हो सकते हैं। पिरोला भी ओमिक्रॉन का ही एक रूप है जिससे निकला एक अन्य सब-वैरिएंट EG.5.1 पहले भी देखा जा चुका है।
वैज्ञानिक कहते हैं, जिस प्रकार की ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की प्रकृति रही है, उसे देखते हुए फिलहाल इस बात की चिंता कम ही है कि ये नए सब-वैरिएंट्स किसी गंभीर रोग का कारण बनेंगे, हालांकि इससे बचाव के लिए प्रयास करना बहुत आवश्यक है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
येल मेडिसिन में संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ स्कॉट रॉबर्ट्स ने एक मेडिकल रिपोर्ट में बताया कि, इन नए वैरिएंट्स में म्यूटेशंस की इतनी अधिक संख्या उल्लेखनीय है, डेल्टा के शुरुआती वैरिएंट्स में भी इसी प्रकार के म्यूटेशंस की संख्या देखी गई थी।
यहां जानना जरूरी है कि वैरिएंट में म्यूटेशंस का मतलब ये पहले वाले वैरिएंट की तुलना में प्रकृति में भिन्न हो सकते हैं। इसके अलावा म्यूटेशनों के बढ़ने के कारण इसके वैक्सीन और पिछले संक्रमणों से शरीर में बनी प्रतिरक्षा को चकमा देने की क्षमता भी काफी बढ़ जाती है।
पिरोला के लक्षण क्या हैं और क्या यह अधिक घातक है?
प्रारंभिक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आमतौर पर BA.2.86 संक्रमित व्यक्तियों में बुखार और सामान्य सर्दी-फ्लू जैसी बीमारी के ही लक्षण देखे जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोगों में खांसी, थकान, सिर और शरीर में दर्द, भूख न लगने, कंजंक्टिवाइटिस, शरीर पर चकत्ते होने, दस्त और सांस लेने में कठिनाई की भी समस्या देखी जा रही है।
यह स्पष्ट नहीं है कि क्या पिरोला अन्य प्रकारों की तुलना में अधिक गंभीर है। हालाँकि, रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) का मानना है कि BA.2.86 वैरिएंट से टीकाकरण वाले लोगों के भी संक्रमित होने का खतरा हो सकता है।
क्या फिर से मास्क की पड़ेगी जरूरत?
नए वैरिएंट्स के बढ़ते संक्रमण के मामलों और इसकी प्रकृति को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन देशों में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, वहां सभी लोगों को कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर को लेकर गंभीरता बरतने की आवश्यकता है। इसके अलावा चूंकि संक्रमण के मामले पिछले एक महीने के भीतर तेजी से कई देशों में बढ़े हैं, इसको देखते हुए सभी स्थानों पर बचाव के लिए प्रयास करते रहने की आवश्यकता है। अमेरिका के कुछ स्टेट्स में लोगों से फिर से मास्क लगाने की सिफारिश भी की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह अनिवार्यता नहीं है, लेकिन कोरोना से बचाव के लिए कारगर तरीका जरूर हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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