ब्लैक फंगस: तेजी से बढ़ रहे हैं मामले, विशेषज्ञों ने निकाला इलाज का 100 गुना सस्ता तरीका
एंफोटेरिसिन का लिपोसोमल फ्रॉम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस संक्रमण से जूझ रहे रोगियों के ब्लड क्रिएटिनिन के स्तर की जांच और सावधानी पूर्वक निगरानी समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकती है। ब्लैक फंगस का इलाज कर रहे सर्जनों ने पाया कि एंफोटेरिसिन इंजेक्शन के लिपोसोमल फ्रॉम का प्रयोग 100 गुना तक सस्ता हो सकता है। एंफोटेरिसिन के इस्तेमाल के दौरान विशेष सावधानी रखने के साथ खून की जांच करते रहना आवश्यक हो जाता है, जिससे किडनी में क्रिएटिनिन के स्तर का पता लगाया जा सके। क्रिएटिनिन एक अपशिष्ट उत्पाद है जिसे किडनी शरीर से बाहर निकालती रहती है।
दोनों ही तरह से प्रभावी है दवा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एंफोटेरिसिन के कारण किडनी की खराबी के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। जिसके चलते इस दवा के लिपोसोमल फ्रॉम की मांग ज्यादा बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि एंफोटेरिसिन के दोनों रूपों की प्रभावकारिता समान है। जिन रोगियों को पहले से ही किडनी फेलियरल या डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या है उन्हें कंवेशनल फ्रॉम में एंफोटेरिसिन देने से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस संक्रमण का असर शरीर के कई अंगों पर देखा जा सकता है। इसमें प्रमुख रूप से आंखों और नाक के आसपास दर्द और लालिमा, बुखार-सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ और कुछ लोगों को उल्टी के साथ खून आने की समस्या हो सकती है। इस तरह के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस बारे में तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।
स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी एडवाइजरी के अनुसार ब्लैक फंगस संक्रमण से बचाव के लिए हाइपरग्लेसेमिया (हाई ब्लड शुगर) को नियंत्रित रखने के साथ कोविड-19 से ठीक होने के बाद तथा सभी डायबिटिक रोगियों को अपने ब्लड शुगर के स्तर की जांच करते रहना चाहिए। स्टेरॉयड का प्रयोग न करें या डॉक्टर के सलाह के अनुसार बहुत कम मात्रा में करें। जिन लोगों को ऑक्सीजन थेरेपी या ह्यूमिडिफ़ायर की आवश्यकता हो रही है उन्हें इसके लिए स्वच्छ और जीवाणुरहित पानी का ही उपयोग करना चाहिए। संक्रमण के लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह से ही एंटीबायोटिक/एंटीफंगल दवाओं का प्रयोग करें।