देशभर में पिछले कुछ महीनों से जारी भीषण गर्मी के बीच मानसून राहत की खबर लेकर जरूर आया है, पर मानसून के साथ-साथ मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी सताने लगा है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में पिछले दिनों डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में डेंगू के मामले सामने आए हैं।
Dengue Risk: मानसून के साथ ही सताने लगा डेंगू का डर, महाराष्ट्र में बढ़े केस; ऐसे करें बचाव
यूएस में भी डेंगू को लेकर अलर्ट
सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अब तक अमेरिका में डेंगू के कुल 2,241 मामले सामने आए हैं। मार्च में मामलों के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल भी घोषित किया गया था। सीडीसी का कहना है कि राज्यों में रिपोर्ट किए गए अधिकांश मामले यात्रा से संबंधित हैं।
एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल वैश्विक स्तर पर डेंगू बुखार की घटनाएं रिकॉर्ड स्तर पर देखी जा रही हैं, खासकर लैटिन अमेरिकी देशों में जहां 9.7 मिलियन से अधिक डेंगू के मामले सामने आए हैं। सीडीसी के अनुसार, यह 2023 (4.6 मिलियन मामले) के कुल मामलों से दोगुना है।
महाराष्ट्र में आने लगे डेंगू के केस
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी जारी है और मानसून के दिनों में इसका खतरा और भी अधिक हो सकता है।
एक रिपोर्ट में राज्य में एंटोमोलॉजिस्ट डॉ महेंद्र जगताप ने बताया, लोगों की अज्ञानता के कारण गमलों, टायरों, टूटे बर्तनों या झुग्गियों के ऊपर प्लास्टिक की चादरों के नीचे पानी जमा हो जाता है। ये सभी मच्छरों के प्रजनन के लिए आदर्श स्थान होते हैं। पोखरों में जमा पानी और बंद नालियां भी डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर के लिए प्रजनन का उपयुक्त स्थल बन जाती हैं। विशेषज्ञों ने यह भी अनुमान लगाया कि समय से पहले और अधिक प्री-मानसून बारिश के कारण इस बार समय से पहले डेंगू के मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं।
डेंगू बुखार के कारण और लक्षण
डेंगू संक्रमित मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी है, हालांकि संक्रमित व्यक्ति के आस-पास रहने से डेंगू बुखार नहीं होता। जब कोई मच्छर डेंगू वायरस से संक्रमित व्यक्ति को काटता है, तो वायरस मच्छर में प्रवेश करता है। फिर, जब संक्रमित मच्छर किसी दूसरे व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उस व्यक्ति के रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है और संक्रमण का कारण बनता है।
डेंगू के लक्षणों में तेज बुखार और फ्लू जैसी समस्या हो सकती है। गंभीर स्थितियों में इसके कारण शरीर के भीतर रक्तस्राव का भी खतरा देखा जाता रहा है। समय पर अगर इसके संकतों पर ध्यान न दिया जाए तो ये गंभीर रक्तस्राव, रक्तचाप में अचानक गिरावट (शॉक) और मृत्यु का कारण बन सकता है।
कैसें करें डेंगू से बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डेंगू से बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है।
- डेंगू वायरस वाले मच्छर सुबह से शाम तक सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, ये रात में भी काट सकते हैं। मच्छरों के काटने से बचने के लिए सुरक्षात्मक कपड़े पहनें।
- लंबी आस्तीन वाली शर्ट और पैंट पहनें।
- मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए घर के आस-पास गंदगी या जलजमाव न होने दें।
- गमलों, कूलर के पानी या खाली बर्तनों में पानी को इकट्ठा होने से रोकें।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए निरंतर उपाय करते रहें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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