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चिंताजनक: दो-तीन दशकों में अल्जाइमर-डिमेंशिया के मामले बढ़ने की आशंका, कहीं आपमें भी तो नहीं है ये गड़बड़ आदत?

Tue, 30 May 2023 12:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला. नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला. नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 30 May 2023 12:17 PM IST
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daily exercise reduced risk of dementia, Association between sedentary behavior and alzheimer
डिमेंशिया रोग का बढ़ता खतरा - फोटो : iStock

अल्जाइमर-डिमेंशिया जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के मामले पिछले एक-दो दशकों में काफी तेजी से बढ़े हैं, विशेषज्ञों को चिंता है कि आने वाले कुछ दशकों में इसके मामले और भी बढ़ सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले इन विकारों में याददाश्त कम होने के साथ निर्णय लेने, काम करने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है जो क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए भी समस्याएं बढ़ाने वाली मानी जाती है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं आनुवांशिकता के साथ लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण इस तरह की दिक्कतें काफी बढ़ गई हैं। विशेषतौर पर लोगों में बढ़ती शारीरिक निष्क्रिया और व्यायाम की कमी इसमें ज्यादा चिंताजनक हो सकती है। जो लोग व्यायाम नहीं करते हैं उनमें उम्र बढ़ने के साथ अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया होने की आशंका अधिक होती है। यह आंशिक रूप से इसलिए है क्योंकि व्यायाम को डिमेंशिया कम कम करने वाला उपाय पाया गया है।

सभी लोगों को व्यायाम की आदत जरूर बनानी चाहिए, यह आपको भविष्य में इन जोखिमों से बचाने में मददगार हो सकती है।

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उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया का जोखिम - फोटो : pixabay

व्यायाम से डिमेंशिया में लाभ

कई अध्ययनों में मध्यम आयु वर्ग के लोगों और जीवन के बाद की अवधि में उनकी सोच और स्मृति पर व्यायाम के प्रभावों का आकलन किया गया। इस तरह के 11 अध्ययनों के परिणामों से पता चलता है कि नियमित व्यायाम करने वाले लोगों में डिमेंशिया विकसित होना का जोखिम लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

यूके अल्जाइमर्स सोसाइटी द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि एरोबिक व्यायाम (व्यायाम जो आपकी हृदय गति को बढ़ाता है) आपकी सोच और स्मृति में सुधार करके डिमेंशिया के जोखिमों को कम करने में लाभकारी हो सकते हैं।

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डिमेंशिया से बचाव के लिए व्यायाम जरूरी - फोटो : iStock

आईएपीएफ टेस्ट से पता कर सकते हैं मस्तिष्क की क्षमता

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मिर्गी या अल्जाइमर रोग जैसी मस्तिष्क संबंधी समस्याओं में अल्फा पीक फ़्रीक्वेंसी (आईएपीएफ) की जांच की जाती है। आईएपीएफ (ईईजी परीक्षण या इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम) वह टेस्ट है जो ध्यान केंद्रित करने और ध्यान देने की आपकी क्षमता को मापता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि तीव्रता वाले व्यायाम करने से आपका आईएपीएफ लेवल बढ़ सकता है जोकि संकेत है कि आपका दिमाग बेहतर तरीके से काम कर रहा है। 

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व्यायाम से दिमाग रहता है स्वस्थ - फोटो : Pixabay

व्यायाम का मस्तिष्क पर असर

शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि वॉकिंग-जॉगिंग या साइकिलिंग जैसे एरोबिक व्यायाम आपके मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं। यह हिस्सा आपकी स्मृति और सीखने की क्षमता से जुड़ा हुआ है। समय के साथ कुछ लोगों का हिप्पोकैम्पस सिकुड़ने लग जाता है जिसके कारण आगे चलकर आपको याददाश्त से संबंधित समस्याओं का जोखिम हो सकता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि यदि आप रोजाना शारीरिक गतिविधि करते हैं तो मस्तिष्क के कार्यों को मजबूत करने और इसमें सुधार करने में लाभ मिल सकता है।

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नियमित व्यायाम सभी के लिए जरूरी - फोटो : Istock

क्या है शोधकर्ताओं की सलाह?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस प्रकार से मानसिक और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य समस्याओं के मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं, हम सभी के लिए आवश्यक है कि इसमें सुधार के तरीके अपनाएं जाएं। एरोबिक व्यायाम, अवसाद और चिंता के लक्षणों को कम करने के साथ दीर्घकालिक तौर पर मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में फायदेमंद पाए गए हैं।

समय के साथ डिमेंशिया के विकसित होने का जोखिम बढ़ रहा है इससे बचाव के लिए जरूरी है कि हम शारीरिक निष्क्रियता के जोखिम को कम करके नियमित व्यायाम को दिनचर्या में जरूर शामिल करें।


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स्रोत और संदर्भ
Physical exercise and dementia

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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