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बाबा रामदेव की कोरोनिल पर विवाद के बाद जानें भारत में कैसे मिलता है नई दवा का लाइसेंस?

Thu, 25 Jun 2020 06:12 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: निलेश कुमार Updated Thu, 25 Jun 2020 06:12 PM IST
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coronil patanjali medicine for Coronavirus Controversy How to get new drug license in India by DGCI Homeopath allopathy or Ayurveda
Drug License in India - फोटो : Pixabay/Amar Ujala

योग गुरू रामदेव की कंपनी पतंजलि ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कोरोनिल टैबलेट और श्वासारि वटी नाम की दो दवाएं दुनिया के सामने पेश कीं। पतंजलि ने दावा किया कि इन दवाओं से कोविड-19 का इलाज किया जा सकेगा। पतंजलि योगपीठ ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इसका क्लिनिकल ट्रायल किया है और कोरोना संक्रमित लोगों पर इसका सौ फीसद सकारात्मक असर हुआ है। पतंजलि की इस घोषणा के कुछ घंटे बाद ही भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस पर संज्ञान लिया और कहा कि मंत्रालय को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।



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Coronavirus Ayurvedic Medicine - फोटो : Pixabay/Amar Ujala

मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को दवा का नाम और उसके घटक बताने को कहा। मंत्रालय ने पतंजलि से सैंपल साइज, वो लैब या अस्पताल जहां टेस्ट किया गया और आचार समिति की मंजूरी समेत दूसरी महत्वपूर्ण जानकारियां भी देने को कहा है। मंत्रालय ने पतंजलि की इस दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी। हालांकि पतंजलि के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण ने इसे 'कम्युनिकेशन गैप' बताते हुए यह दावा किया है कि 'उनकी कंपनी ने आयुष मंत्रालय को सारी जानकारी दे दी है।'

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कोरोनिल - फोटो : Twitter

बालकृष्ण ने अपने ट्वीट में लिखा है कि "यह सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन व गौरव देने वाली है। क्लिनिकल ट्रायल के जितने भी तय मानक हैं, उन 100 प्रतिशत पूरा किया गया है।" 24 जून को एक दूसरा ट्वीट कर उन्होंने यह जानकारी भी साझा कि आयुष मंत्रालय को उनके सारे दस्तावेज मिल गए। आयुष मंत्रालय के अलावा आईसीएमआर ने भी इस तरह की किसी भी दवा से जुड़े होने से इनकार किया है। सामान्य परिस्थितियों में किसी दवा को विकसित करने और उसका क्लिनिकल ट्रायल पूरा होने में कम से कम तीन साल तक का समय लगता है लेकिन अगर स्थिति अपातकालीन हो तो भी किसी दवा को बाजार में आने में कम से कम दस महीने से सालभर तक का समय लग जाता है।

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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : social media

भारत में किसी दवा या ड्रग को बाजार में उतारने से पहले किसी व्यक्ति, संस्था या स्पॉन्सर को कई चरणों से होकर गुजरना होता है। इसे आम भाषा में ड्रग अप्रूवल प्रोसेस कहते हैं। अप्रूवल प्रोसेस के तहत, क्लिनिकल ट्रायल के लिए आवेदन करना, क्लिनिकल ट्रायल कराना, मार्केटिंग ऑथराइजेशन के लिए आवेदन करना और पोस्ट मार्केटिंग स्ट्रेटजी जैसे कई चरण आते हैं। हालांकि हर देश में अप्रूवल का एक ही तरीका हो यह जरूरी नहीं है। विभिन्न देशों में अपने कुछ विशेष प्रावधान और नियम होते हैं।

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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

भारत में कैसे मिलता है अप्रूवल
भारत का औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और नियम 1945 औषधियों तथा प्रसाधनों के निर्माण, बिक्री और वितरण को विनियमित करता है। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियम 1945 के अंतर्गत ही भारत सरकार का केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ- ) दवाओं के अनुमोदन, परीक्षणों का संचालन, दवाओं के मानक तैयार करने, देश में आयातित होने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर नियंत्रण और राज्य दवा नियंत्रण संगठनों को विशेष सलाह देते हुए औषधि और प्रसाधन सामग्री के लिए उत्तरदायी है।

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