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आंखों ही नहीं, आंसुओं से भी फैल सकता है कोरोना वायरस

Thu, 04 Jun 2020 01:29 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Thu, 04 Jun 2020 01:29 PM IST
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Coronavirus can spread through eyes and Covid 19 infected patients tears are dangerous too
आंखों से भी फैल सकता है कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay

अभी तक यही कहा जाता था कि कोरोना वायरस नाक और मुंह के जरिए फैल सकता है। विशेषज्ञों ने इस बारे में एक नया खुलासा किया है उनका कहना है कि यह जानलेवा वायरस आंखों के जरिए भी फैल सकता है। यानी अब आंखों की भी सुरक्षा जरूरी हो गई है। हालांकि शोधकर्ताओं ने कानों के जरिए फैलने की आशंका से इनकार किया है।



विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई संक्रमित व्यक्ति नजदीक हो बर्खास्त आया चिंता है तो कोविड-19 नाक और मुंह के साथ आंखों के जरिए भी दूसरे व्यक्ति को बीमार बना सकता है। यही नहीं पाया गया है कि यदि किसी व्यक्ति का हाथ जानलेवा वायरस के संपर्क में आता है। और वह इन्हीं दूषित हाथों से आंखों को छूता है तो उसमें भी संक्रमण के फैलने की आशंका होती है। यही नहीं विशेषज्ञों का कहना है कि किसी संक्रमित व्यक्ति के आंसुओं से भी वायरस के चपेट में आने का खतरा रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार हाथ धोकर सामाजिक दूरी का पालन करके और चेहरा ढक कर इस वायरस को फैलने से रोका जा सकता है।

Coronavirus can spread through eyes and Covid 19 infected patients tears are dangerous too
कोरोना वायरस आंखों से भी फैल सकता है - फोटो : pixa

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थेल्मोलॉजी की मानें, तो चश्मा पहनने से भी इस जानलेवा वायरस से सुरक्षा हो सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य देखभाल करने वाले मेडिकल कर्मचारियों को भी संक्रमित मरीजों का इलाज करते वक्त चश्मा पहने रहने की सलाह दी गई है। वहीं अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र का कहना है कि कानों से कोरोना वायरस के फैलने की आशंका नहीं है। इससे पहले एक अध्ययन में पाया गया था कि कोरोना वायरस ने से रोकने के लिए एक दूसरे से 6 फुट की दूरी बनाने का नियम नाकाफी है और यह जानलेवा वायरस छींकने और खांसने से करीब 20 फुट की दूरी तक जा सकता है।

Coronavirus can spread through eyes and Covid 19 infected patients tears are dangerous too
कोरोना की जांच के लिए नमूने एकत्र करते स्वास्थ्य कर्मी(File Photo) - फोटो : PTI
वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में यह भी पाया था कि कोरोनावायरस नमी वाले मौसम में 3 गुना तक फैल सकता है छींकने या खास ने के दौरान निकली संक्रामक बूंदे वायरस को 20 फुट की दूरी तक ले जा सकती है वैज्ञानिकों का कहना है कि छींकने और यहां तक कि सामान्य बातचीत से करीब 40 हजार बूंदे निकल सकती हैं। यह बूंदे प्रति सेकंड में कुछ मीटर से लेकर कुछ सौ मीटर दूर तक जा सकती हैं। अध्ययन में पाया गया कि बड़ी बूंदे गुरुत्वाकर्षण के कारण किसी चीज पर जम जाती हैं। लेकिन छोटी बूंद एयरोसोल कानों को बनाने के लिए तेजी से फैल जाती हैं।
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ब्राजील ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैक्सीन ट्रायल को दी मंजूरी

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कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay
विश्वव्यापी महामारी कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक और चिकित्सक वैक्सीन या दवा बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। कई देशों ने वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल भी किया है और आगे इंसानों पर इसके परीक्षण के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि अभी तक इस में कोई सफलता नहीं मिल पाई है। इसी बीच ब्राजील ने भी कोरोना वायरस इनके क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी दे दी है। ब्राजील के हेल्थ रेगुलेटर एनविसा ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित और एक्स्ट्रा जैनिक पीएलसी द्वारा समर्थित संभावित कोरोना वायरस इनके लिए मानव पर क्लिनिकली परीक्षण को मंजूरी दी है।
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मास्क के साथ चश्मा भी है जरूरी(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
वैज्ञानिकों ने अब ब्रिटेन यूरोप और अमेरिका में कोरोना के प्रभाव कमियां फिर संचरण दर नीचे आने के साथ ही कोरोना वैक्सीन के संभावित टीकों के परीक्षण के लिए ब्राजील जैसे देशों की ओर रुख किया है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का वैक्सीन जोकि एक्स्ट्राजेनेक पीएलसी द्वारा समर्थित है। पहले कोरोना टीको में से है जो दूसरे चरण या मध्य चरण में है। वैक्सीन के विकास में तेजी लाने के लिए वैज्ञानिक एक साथ दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण साथ-साथ कर रहे हैं जिसमें एक व्यापक आयु वर्ग शामिल है।
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