दीवाली का त्योहार पूरे पांच दिनों का त्योहार होता है। जिसमें हर दिन का अपना एक विशेष महत्व होता है। कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला दीवाली का त्योहार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से शुरु होता है। जिसे धनतेरस के नाम से जानते है। दीवाली के उत्सव की शुरुआत इसी दिन से हो जाती है। धनतेरस वाले दिन खरीदारी करने और धन के देवता कुबेर की पूजा का विधान है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि धनतेरस वाले दिन लोग स्टील के बर्तन या फिर सोने चांदी के आभूषण क्यों खरीदते हैं। पुराणों में इसके पीछे एक कहानी है, आइए जानें उस कहानी के बारे में।
Dhanteras 2019: क्या आप जानते हैं धनतेरस के दिन क्यों खरीदे जाते हैं बर्तन या सोने-चांदी के आभूषण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मान्यता है कि धनतेरस वाले दिन सोने, चांदी या तांबे के बर्तन खरीदने से घर में सौभाग्य आता है और पूरे साल धन की आवक बनी रहती है। इस दिन खरीदारी करने से घर के प्रत्येक सदस्य के ऊपर से बुरी आपदाओं का नाश होता है और किस्मत चमक जाती है।
पौराणिक कहानी के अनुसार राजा हिम के पुत्र के ऊपर मृत्यु का भय था। ये भविष्वाणी हुई थी कि विवाह के चौथे दिन राजा के पुत्र की मृत्यु हो जाएगी। विवाह के चौथे दिन जब यमराज सांप का भेष धर कर राजा के पुत्र को लेने आए तो उनकी नवविवाहिता पत्नी ने साहस दिखाते हुए कमरे के चारों तरफ दीये जला दिए और अपने सारे आभूषण और बर्तन कमरे के प्रवेश द्वार पर रख दिए।
सोने चांदी के आभूषणों की चकाचौंध से सांप (जो कि यमराज का रूप था) की आंखे भ्रमित हो गई और वह बिना राजा के पुत्र की आत्मा को लिए चली गई।
पौराणिक कथा की इसी मान्यता के अनुसार धनत्रयोदशी वाले दिन बर्तन या फिर सोने चांदी के आभूषण खरीदने का विधान है। कहते हैं कि बर्तनों को खरीदने से परिवार के हर सदस्य के ऊपर से बीमारी और आपदाओं का संकट कट जाता है और सौभाग्य घर में आता है।