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सरकारी नौकरियां छोड़ शहीद डीएसपी अमन ने ज्वाइन की थी पुलिस, पत्नी बोलीं- कहां चले गए
Mon, 25 Feb 2019 01:57 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Mon, 25 Feb 2019 01:57 PM IST
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DSP Aman Thakur
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अकेले लड़ना सीखो... ये शब्द शहीद डीएसपी अमन ठाकुर की फेसबुक अकाउंट की प्रोफाइल फोटो पर लिखे हैं। यह चंद अल्फाज ही ठाकुर की असल जिंदगी की पूरी कहानी बयां करते हैं। आतंकियों से मोर्चा लेने वाले अभियानों का वह हमेशा से आगे बढ़कर नेतृत्व करते थे। कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान उनकी शहीद होने की जानकारी मिली तो परिजनों से लेकर पूरे इलाके के लोगों की आंखें नम हो गई। परिवार वालों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
DSP Aman Thakur
जिंदादिली और सादगी का हर कोई कायल
अमन के बैचमेट रहे डीएसपी निखिल रसगोत्रा का कहना है कि उनकी जिंदादिली और सादगी का हर कोई कायल था। अमन को जहां भी जो भी काम मिला, उसने उतनी ही शिद्दत से किया। उसकी हमेशा कोशिश होती थी कि वह फील्ड में रहकर काम करें। आतंकियों से लड़ने के लिए हर दम तैयार था।
अमन के बैचमेट रहे डीएसपी निखिल रसगोत्रा का कहना है कि उनकी जिंदादिली और सादगी का हर कोई कायल था। अमन को जहां भी जो भी काम मिला, उसने उतनी ही शिद्दत से किया। उसकी हमेशा कोशिश होती थी कि वह फील्ड में रहकर काम करें। आतंकियों से लड़ने के लिए हर दम तैयार था।
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डोडा के गोगला निवासी
शहीद डीएसपी अमन ठाकुर मूल रूप से डोडा जिले के गोगला गांव के रहने वाले थे। अब उनका परिवार जम्मू के नागबनी में रहता है। अमन अपनी पत्नी सरला ठाकुर के साथ रेशमघर कालोनी में किराये पर रहते थे। उनका एक सात साल का बेटा आर्य विश्व प्रताप ठाकुर भी है। अमन के शहीद होने की खबर सुनते ही सरला बदहवास हो गई। सब उन्हें ढांढस बंधाते रहे, लेकिन आंसु रुकने का नाम नहीं ले रहे। वह बार बार एक ही बात कहती रहीं कि तुम कहां चले गए। अमन 15 फरवरी को घर आए थे।
शहीद डीएसपी अमन ठाकुर मूल रूप से डोडा जिले के गोगला गांव के रहने वाले थे। अब उनका परिवार जम्मू के नागबनी में रहता है। अमन अपनी पत्नी सरला ठाकुर के साथ रेशमघर कालोनी में किराये पर रहते थे। उनका एक सात साल का बेटा आर्य विश्व प्रताप ठाकुर भी है। अमन के शहीद होने की खबर सुनते ही सरला बदहवास हो गई। सब उन्हें ढांढस बंधाते रहे, लेकिन आंसु रुकने का नाम नहीं ले रहे। वह बार बार एक ही बात कहती रहीं कि तुम कहां चले गए। अमन 15 फरवरी को घर आए थे।
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खाकी के लिए छोड़ दी दो नौकरियां
अमन के करीबियों ने बताया कि उसका खाकी के प्रति इतना प्रेम था कि इसके लिए उन्होंने पहले दो सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। पहली नौकरी सोशल वेलफेयर विभाग तथा दूसरी लेक्चरर के पद पर की थी। वह जूलोजी में मास्टर डिग्री लिए थे। डीजीपी दिलबाग सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि अमन निडरतापूर्वक हमेशा अपनी टीम को लीड करने के लिए तैयार रहते था।
अमन के करीबियों ने बताया कि उसका खाकी के प्रति इतना प्रेम था कि इसके लिए उन्होंने पहले दो सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। पहली नौकरी सोशल वेलफेयर विभाग तथा दूसरी लेक्चरर के पद पर की थी। वह जूलोजी में मास्टर डिग्री लिए थे। डीजीपी दिलबाग सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि अमन निडरतापूर्वक हमेशा अपनी टीम को लीड करने के लिए तैयार रहते था।
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- फोटो : अमर उजाला
लगा कि वह डीएसपी हैं
अमन के मोहल्ले में रहने वाले लोगों ने कहा कि उन्हें कभी लगा ही नहीं कि उनके मोहल्ले में एक पुलिस अफसर रहता है। वह जब भी घर आते तो इस तरह से मोहल्ले के लोगों से बात करते, जैसे वह सामान्य इंसान हों। हर किसी से मिलजुलकर और प्यार से बात करते थे।
अमन के मोहल्ले में रहने वाले लोगों ने कहा कि उन्हें कभी लगा ही नहीं कि उनके मोहल्ले में एक पुलिस अफसर रहता है। वह जब भी घर आते तो इस तरह से मोहल्ले के लोगों से बात करते, जैसे वह सामान्य इंसान हों। हर किसी से मिलजुलकर और प्यार से बात करते थे।