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आतंकियों से हर दम लोहा लेने के लिए तैयार रहते थे डीएसपी अमन ठाकुर
Mon, 25 Feb 2019 01:37 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Mon, 25 Feb 2019 01:37 AM IST
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DSP Aman Thakur
- फोटो : अमर उजाला
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कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़ में जम्मू का लाल शहीद हो गया। जिसकी शहादत पर हर किसी की आंखें नम हैं। लेकिन गर्व से चीना चौड़ा है। अकेले लड़ना सीखो, यह शब्द शहीद डीएसपी अमन ठाकुर के फेसबुक पर उनकी प्रोफाइल फोटो में लिखे हुए है। जो उनकी असल जिंदगी पर भी सटीक बैठते हैं। आतंकियों से मुठभेड़ को लीड करने वाले डीएसपी अमन ठाकुर ने आगे बढ़कर अकेले ही मोर्चा संभाला। इसी में वह शहीद हो गए।
DSP Aman Thakur
- फोटो : फाइल
वह एक ऐसे अफसर थे, जिन्हें कार्यालय में बैठना पसंद नहीं था। हर समय फील्ड में ड्यूटी करना पसंद थी। इसलिए हमेशा से ही अपने सीनियर से कहते थे कि सर उन्हें बाहर भेजें। करीब डेढ़ साल पहले अमन को कुलगाम में पुलिस के आतंक विरोधी दल का नेतृत्व करने का जिम्मा दिया था। इससे पहले वह जम्मू में आईआरपी 10 बटालियन में थे। 2011 बैच के केपीएस अधिकारी अमन के बैचमेट रहे डीएसपी निखिल रसगोत्रा का कहना है कि अमन की जिंदादिली और सादगी का हर कोई कायल था। अमन को यहां भी, जो भी काम मिला, उसने उतनी ही शिद्दत से किया। लेकिन उसकी हमेशा कोशिश होती थी कि वह फील्ड में रहकर काम करे। आतंकियों से लड़ने के लिए हर दम तैयार था।
DSP Aman Thakur
- फोटो : अमर उजाला
कहां तुम चले गए...
शहीद डीएसपी अमन ठाकुर मूल रूप से डोडा जिले के गोगला गांव के रहने वाले थे। लेकिन उनका परिवार अब जम्मू के नागबनी में सेटल है। अमन अपनी पत्नी सरला ठाकुर के साथ जम्मू के रेशमघर कालोनी में किराये पर रहते थे। उनका एक सात साल का बेटा आर्य विश्व प्रताप ठाकुर भी है। अमन के शहीद होने की खबर सुनते ही सरला आंसुओं के सैलाब में डूब गई। सब उन्हें ढांढस बंधाते रहे, लेकिन आंसु रुकने का नाम नहीं ले रहे। वह बार बार एक ही बात कहती रहीं कि तुम कहां चले गए। अभी 15 फरवरी को ही तो तुम घर आए थे।
शहीद डीएसपी अमन ठाकुर मूल रूप से डोडा जिले के गोगला गांव के रहने वाले थे। लेकिन उनका परिवार अब जम्मू के नागबनी में सेटल है। अमन अपनी पत्नी सरला ठाकुर के साथ जम्मू के रेशमघर कालोनी में किराये पर रहते थे। उनका एक सात साल का बेटा आर्य विश्व प्रताप ठाकुर भी है। अमन के शहीद होने की खबर सुनते ही सरला आंसुओं के सैलाब में डूब गई। सब उन्हें ढांढस बंधाते रहे, लेकिन आंसु रुकने का नाम नहीं ले रहे। वह बार बार एक ही बात कहती रहीं कि तुम कहां चले गए। अभी 15 फरवरी को ही तो तुम घर आए थे।
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DSP Aman Thakur
- फोटो : अमर उजाला
सांत्वना देने पहुंचे केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
रेशमघर कालोनी स्थित अमन ठाकुर के किराये के घर पर उनकी पत्नी को सांत्वना देने वालों का हुजूम लग गया। खबर लगते ही सबसे पले जम्मू के डीआईजी विवेक गुप्ता, एसएसपी तेजिंदर सिंह, आईजी एम के सिन्हा, फिर राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार और फिर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पहुंचे। अधिकारियों ने शहीद की पत्नी को सांत्वना दी।
रेशमघर कालोनी स्थित अमन ठाकुर के किराये के घर पर उनकी पत्नी को सांत्वना देने वालों का हुजूम लग गया। खबर लगते ही सबसे पले जम्मू के डीआईजी विवेक गुप्ता, एसएसपी तेजिंदर सिंह, आईजी एम के सिन्हा, फिर राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार और फिर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पहुंचे। अधिकारियों ने शहीद की पत्नी को सांत्वना दी।
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- फोटो : अमर उजाला
कभी नहीं लगा कि वह डीएसपी हैं
अमन के मोहल्ले में रहने वाले लोगों ने कहा कि उन्हें कभी लगा ही नहीं कि उनके मोहल्ले में एक पुलिस अफसर रहता है। वह जब भी घर आते तो इस तरह से मोहल्ले के लोगों से बात करते, जैसे वह सामान्य इंसान हों। हर किसी से मिलजुलकर और प्यार से बात करते थे।
अमन के मोहल्ले में रहने वाले लोगों ने कहा कि उन्हें कभी लगा ही नहीं कि उनके मोहल्ले में एक पुलिस अफसर रहता है। वह जब भी घर आते तो इस तरह से मोहल्ले के लोगों से बात करते, जैसे वह सामान्य इंसान हों। हर किसी से मिलजुलकर और प्यार से बात करते थे।