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World Environment Day: कोरोना-तूफान या टिड्डियों का हमला, ये सब प्रकृति से छेड़छाड़ का है नतीजा

Fri, 05 Jun 2020 01:59 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 05 Jun 2020 01:59 PM IST
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World Environment Day: Corona or Locust attack, all this is result of tampering with nature
विश्व पर्यावरण दिवस - फोटो : अमर उजाला

दुनिया में वैश्विक स्तर पर कोरोना संकट इंसानों की ही देन है। प्रकृति से लगातार हो रही छेड़छाड़ से मानव जीवन के सामने कई गंभीर चुनौतियां और समस्याएं खड़ी हो गई हैं। हम आज भी कोरोना से सीख न लेकर विकास, अर्थव्यवस्था और दूसरी चीजों को तवज्जो दे रहे हैं, जबकि पर्यावरण संतुलन पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जा रहा है। हमें जानवरों, पेड़ पौधों, पहाड़ों, ग्लेशियर आदि प्राकृतिक स्रोतों से संतुलन कायम रखना होगा। यह कहना है कि जम्मू कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व चेयरमैन व वरिष्ठ पर्यावरणविद डॉ. चंद्र मोहन सेठ का।



 

World Environment Day: Corona or Locust attack, all this is result of tampering with nature
विश्व पर्यावरण दिवस - फोटो : सोशल मीडिया

सेठ का कहना है कि कोरोना ने पूरी दुनिया को एक सीख दी है कि जब इंसान प्रकृति का सम्मान नहीं करेगा तो प्रकृति खुद ही अपना संतुलन बनाने के लिए ऐसा काम करेगी। उन्होंने कहा कि 1974 में स्टाक होम कान्फ्रेंस में मानव पर्यावरण पर मंथन किया गया था। करीब 150 देशों ने इसमें शिरकत कर मानव पर्यावरण को संतुलित रखने का संकल्प लिया।

World Environment Day: Corona or Locust attack, all this is result of tampering with nature
भद्रवाह जम्मू कश्मीर - फोटो : सोशल मीडिया

इसके बाद कई नीतियां बनाई गईं लेकिन जमीनी स्तर पर उन पर अमल नहीं हुआ। प्रकृति के असंतुलित होने में सबसे बड़ी भूमिका बढ़ती जनसंख्या है। उस समय दुनिया की जनसंख्या 4 बिलियन थी जो 2020 में करीब 7.78 बिलियन पहुंच गई है। इससे हर चीज की मांग बढ़ी है, जिससे प्रकृति पर दबाव बढ़ने से वह असंतुलित हुई है।

 

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World Environment Day: Corona or Locust attack, all this is result of tampering with nature
विश्व पर्यावरण दिवस

जम्मू कश्मीर में ही कुछ मिसाल ऐसी हैं, जैसे रामबन में हाईवे के विस्तार के लिए पहाड़ों के सीने को लगातार छलनी किया जा रहा है, जम्मू में हाईवे के विस्तार के लिए कई इलाकों में कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया है, ऐसी गतिविधियों से सीधे तौर पर प्रकृति पर असर पड़ता है और यह सब जनसंख्या की मांग को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। इसी विकास के साथ भविष्य के लिए कई नकारात्मक प्रभाव भी सामने आ रहे हैं।

 

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World Environment Day: Corona or Locust attack, all this is result of tampering with nature
अम्फान - फोटो : PTI

विविधता में 60 फीसदी पेड़ पौधों और अन्य प्रजातियों में कमी देखी जा रही है। इससे गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 70 साल बाद बड़े तूफान देखने को मिल रहे हैं। इसी तरह विदेशों से होकर जो टिड्डी दल कृषि क्षेत्र को नष्ट कर रहे हैं, उसका बड़ा कारण पशु पक्षियों का कम होना है, जो प्रकृति को संतुलित बनाए रखने के लिए टिड्डी दल को अपनी खुराक बना लेते थे।

 

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