370 हटने के बाद अब स्वामी की पीओके पर नजर, क्या 'मोदी के महारथी' करेंगे ऐसा
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एक राज्य, दो झंडे और दो विधान यह सब अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को खत्म करके एक नए अध्याय का आरंभ कर दिया। इस नए अध्याय में सब इतना आसान होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन भाजपा के दिग्गज नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने संसद में प्रस्ताव लाकर पीओके की जमीन भी वापस लेनी की बात कही है।
मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसले में जम्मू कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, राज्यसभा में राज्य पुनगर्ठन बिल के जरिए सूबे को दो हिस्सों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांट कर इन्हें केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने का प्रस्ताव रखा। इनमें जम्मू-कश्मीर को विधायिका शक्ति वाला तो लद्दाख को बिना विधायिका शक्ति वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव किया। बिल पर राज्यसभा ने मुहर भी लगा दी।
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लंबी बहस के बाद आखिरकार लोकसभा में भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास कर दिया गया। गृहमंत्री अमित शाह के जवाब के बाद इस पर वोटिंग हुई। इसके समर्थन में 366 वोट और विरोध में 66 वोट पड़े। इस दौरान अमित शाह ने देश के पहले प्रधानमंत्री को लेकर कहा कि जम्मू कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र में कौन ले गया। पंडित जवाहरलाल नेहरू ले गए थे। इतिहास तय करेगा कि अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला सही है या नहीं। लेकिन जब भी इसका जिक्र होगा तो पीएम नरेंद्र मोदी को याद किया जाएगा।
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वहीं सुब्रमण्यम ने कहा कि अनुच्छेद-370 तो अब जा चुका है। कश्मीर भारत देश का हिस्सा है साथ ही कश्मीर पर कोई मध्यस्थता भी नहीं होगी। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संसद में प्रस्ताव के तहत पीओके की जमीन भी वापस लेनी चाहिए।
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यही वह आवाज है जिससे पाक भी बौखलाया हुआ है। हालांकि गृहमंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि पीओके भी भारत का हिस्सा है। अब आने वाला वक्त ही बताएगा कि मोदी के महारथी इस आवाज को अंजाम तक कब और कैसे पहुंचाएंगे।