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Vikram Batra: कारगिल हीरो विक्रम बत्रा का 23वां शहीदी दिवस आज, दुश्मन कहते थे शेरशाह, पढ़ें उनकी दिलेरी की कहानी

Thu, 07 Jul 2022 01:41 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Thu, 07 Jul 2022 01:41 PM IST
सार

परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा 7 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में देश के लिए शहीद हो गए थे। विक्रम बत्रा की शहादत के बाद प्वाइंट 4875 चोटी को बत्रा टॉप का नाम दिया गया है।

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Vikram Batra Martyr Day: 23rd Martyrdom Day of Kargil Hero captain Vikram Batra Today enemies used to say Sher Shah read fully story
परमवीर विक्रम बत्रा - फोटो : सोशल मीडिया

23 साल पहले आज ही के दिन कैप्टन विक्रम बत्रा ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। कैप्टन बत्रा से दुश्मन भी थर-थर कांपते थे। उनकी बहादुरी के कारण ही दुश्मनों ने उन्हें 'शेरशाह' नाम दिया था। 



शहीद विक्रम बत्रा ने 1996 में इंडियन मिलिटरी अकादमी में दाखिला लिया था। 6 दिसंबर 1997 को कैप्टन बत्रा जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 13वीं बटालियन में बतौर लेफ्टिनेंट शामिल हुए। कारगिल युद्ध में उन्होंने जम्मू-कश्मीर राइफल्स की 13वीं बटालियन का नेतृत्व किया।

Vikram Batra Martyr Day: 23rd Martyrdom Day of Kargil Hero captain Vikram Batra Today enemies used to say Sher Shah read fully story
kargil hero Vikram Batra - फोटो : सोशल मीडिया

परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा 7 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में देश के लिए शहीद हो गए थे। विक्रम बत्रा की शहादत के बाद प्वाइंट 4875 चोटी को बत्रा टॉप का नाम दिया गया है। हालांकि, कारगिल युद्ध के 23 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इस युद्ध के हीरो के अदम्य साहस और वीरता की कहानियां हर किसी के दिल में जोश भर देती हैं। 

9 सितंबर 1974 को हिमाचल के पालमपुर में घुग्गर गांव में जन्मे शहीद विक्रम बत्रा को उनकी बहादुरी के कारण दुश्मन भी उन्हें शेरशाह के नाम से जानते थे। 

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vikram batra

जीत का कोड दिया- ये दिल मांगे मोर

20 जून 1999 को कैप्टन बत्रा ने कारगिल की प्वाइंट 5140 चोटी से दुश्मनों को खदेड़ने के लिए अभियान छेड़ा और कई घंटों की गोलीबारी के बाद मिशन में कामयाब हो गए। इसके बाद उन्होंने जीत का कोड बोला- ये दिल मांगे मोर। अदम्य वीरता और पराक्रम के लिए कमाडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल वाय.के. जोशी ने विक्रम को शेरशाह उपनाम से नवाजा था।

कारगिल युद्ध के दौरान जब उन्हें 5140 चोटी को कब्जे में लेने का ऑर्डर मिला तो कैप्टन बत्रा अपने पांच साथियों को लेकर मिशन पर निकल पड़े। पाकिस्तानी सैनिक चोटी के टॉप पर थे और मशीन गन से ऊपर चढ़ रहे भारतीय सैनिकों पर गोलियां बरसा रहे थे। लेकिन बत्रा ने हार नहीं मानी और एक के बाद एक पाकिस्तानी को ढेर करते हुए इस चोटी पर कब्जा कर लिया।

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कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा

कैप्टन विक्रम खुद गंभीर रूप से घायल भी हुए लेकिन आखिरकार लंबी गोलीबारी के बाद इस पर अपना कब्जा कर लिया। 4875 प्वांइट पर कब्जे के दौरान भी बत्रा ने बेहद बहादुरी दिखाई और इस परमवीर ने सैनिक को यह कहकर पीछे कर दिया कि 'तू बाल-बच्चेदार है, पीछे हट जा'। खुद आगे आकर बत्रा ने दुश्मनों की गोलियां खाईं। उनके आखिरी शब्द थे 'जय माता दी'। 

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कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा, 'कारगिल युद्ध में अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले, परमवीर चक्र से सम्मानित माँ भारती के वीर सपूत कैप्टन विक्रम बत्रा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन।'‬

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