कोविड-19 का असर सबसे ज्यादा शैक्षणिक प्रणाली पर पड़ा है। इस मुश्किल दौर में जब बच्चों के लिए स्कूलों के दरवाजे बंद हुए तो शिक्षा का स्वरूप ही बदल गया। जम्मू-कश्मीर में बच्चों तक शिक्षा की अलख जगाने के लिए शिक्षकों ने रेडियो-टीवी और मोबाइल से ऑनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ इन डिजिटल उपकरण से वंचित दूरदराज क्षेत्रों के बच्चों के लिए खुले आसमान के नीचे सामुदायिक कक्षाएं शुरू कीं।
कोविड की मुश्किल घड़ी में शिक्षकों ने अहम भूमिका निभाते हुए बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखा। शहरों में सुविधा संपन्न बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई काफी आसान थी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और सुविधाओं से वंचित बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई चुनौती थी। शिक्षकों के व्यक्तिगत प्रयासों से ही इन बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा रखा।
विषय से जुड़ी चीजों को दिखाकर पढ़ाई करवाई
कोविड के कारण स्कूल बंद हुए तो बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के साथ जोड़ना काफी चुनौती भरा काम था। बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई चुनौती भरा काम था। बच्चों और उनके अभिभावकों को ऑनलाइन पढ़ाई के महत्व के बारे में बताया। उनका साइंस विषय है। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई रचनात्मक लगे इसके लिए विषय से जुड़ी चीजों को उनके समाने रखता हूं, ताकि उनके सामने एक चित्र बना रहे और वे आसानी से समझ सकें। बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वीडियो अपलोड करता हूं, ताकि वहां से भी पढ़ सकें। - रोशल लाल, अध्यापक, राजकीय एचएस स्कूल चौकीचौरा
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पढ़ाई करते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
राजकीय मिडल स्कूल ठंडापानी, राजोरी की अध्यापिका गीता भारती ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों तक पहुंच बनाना काफी चुनौती भरा काम रहा। बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास गुणात्मक हो इसके लिए आसान भाषा में उन्हें समझातीं थी।
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उन्होंने बताया कि जिन बच्चों के पास डिजिटल उपकरण नहीं थे, उनके लिए विषय के नोट्स उनके गांव तक पहुंचाने का काम किया। डायट के साथ मिलकर बच्चों के लिए वीडियो बनाए। कोविड के शुरूआती दौर में बच्चों को जोड़ने में काफी मुश्किल हुई, लेकिन अब बच्चे और अभिभावक जागरूक हो चुके हैं और समय पर ऑनलाइन क्लास से जुड़ जाते हैं।
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राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सरना के अध्यापक नरेंद्र चिब ने बताया कि कोविड के समय ड्यूटी क्वारंटीन केंद्र में लगी थी। क्वारंटीन केंद्र में ड्यूटी के साथ-साथ बच्चों को पढ़ाई भी करवाते थे। वह राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सरना, सांबा में कार्यरत थे और कोविड के दौरान स्कूल और इलाके में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सामुदायिक कक्षाएं शुरू कीं। इसमें 12वीं कक्षा के सात छात्र थे, बोर्ड के परिणामों में सात छात्रों की डिस्टिंक्शन आई थी।
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- फोटो : अमर उजाला
बताया कि बच्चों में विश्वास पैदा किया, कोविड के समय में उन्हें पढ़ाई से लगातार जोड़े रखा। बच्चों के साथ उनके अभिभावकों को ऑनलाइन और सामुदायिक क्लास के महत्व के बारे में बताया।