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विजय दिवसः कहानी उस वीर सपूत की, जिसने कश्मीर पर कब्जा करने आए दुश्मन को दौड़ा-दौड़कर किया ढेर

Mon, 16 Dec 2019 11:53 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 16 Dec 2019 11:53 AM IST
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story of 1971 india pakistan war held on 16 december, Story of Pakistan's surrender
1971 का भारत पाक युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया
आज के ही दिन साल 1971 में पाकिस्तान ने एक नापाक हरकत की थी। उसकी कायराना हरकत की जगहंसाई भी हुई थी। भारत-पाकिस्तान युद्ध में 95000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। इसी के साथ बांग्लादेश बना। इस युद्ध में सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने उच्चतम वीरता और साहस का परिचय दिया था।
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भारत-पाकिस्तान 1971 युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

दरअसल पाकिस्तान की योजना कश्मीर पर कब्जा करने की थी। इसके लिए उसने बड़ी संख्या में सियालकोट सेक्टर में अपनी फौज को तैनात कर दिया और शकरगढ़ सेक्टर में बसंतर नदी (सांबा) से टैंकों के जरिये हमला बोल कर जम्मू-कश्मीर को पंजाब से अलग-थलग करना चाहता था। 

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1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

15 दिसंबर को अरुण खेत्रपाल एक आर्म्ड स्क्वार्डन की कमान संभाल रहे थे। इसी दौरान एक-दूसरे स्क्वार्डन को दुश्मन की सेना का सामना करने के लिए मदद की जरूरत पड़ी और उन्हें मदद के लिए ब्रिगेड मुख्यालय जरपाल पहुंचने का संदेश मिला। 

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1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

रास्ते में लैंडमाइंस बिछी थी, जिनको हटाने के लिए कुछ और दिन लगने थे। दुश्मन की तरफ से गोलाबारी भी जारी थी। इन सब बाधाओं की परवाह किए बगैर वे पूना हॉर्स की स्क्वार्डन लेकर 16 दिसंबर की सुबह जरपाल पहुंच गए। 

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1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

दुश्मन के कुछ टैंकों को तबाह करते हुए उन्हें खदेड़ने में कामयाब रहे। वे सेंचुरियन टैंक पर सवार थे। दो अन्य अफसर भी दस्ते में थे, जो अलग-अलग टैंकों पर थे। कुछ घंटों के बाद दुश्मन ने बड़ी संख्या में पैटन टैंक के डिवीजन के रूप मेें दूसरा जोरदार हमला किया।

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