कभी चुनाव बहिष्कार की राजनीति का गढ़ रहे श्रीनगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में सोमवार को नजारा बिल्कुल बदला नजर आया। 28 साल बाद सबसे अधिक 37.99 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। अपने घरों से बेखौफ निकले मतदाताओं ने 24 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम में लॉक कर दिया। इस सीट पर मतदान सुबह 7 बजे शुरू हो गया था जो शाम छह बजे तक निर्बाध गति से चलता रहा।
जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पीके पोले ने मतदान समाप्त होने के बाद संवाददाताओं से कहा, श्रीनगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में शाम 5.00 बजे तक, 36 प्रतिशत था जो रात 9 बजे 37.99 फीसदी पहुंच गया। इससे पहले 1996 में 40.94 फीसदी मतदान हुआ था।
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श्रीनगर लोकसभा चुनाव
- फोटो : बासित जरगर
पीके पोले ने कहा, पहले दो चरणों के अनुभव के अनुसार, वोटों की अंतिम संख्या तीन से चार प्रतिशत बढ़ जाती है। अगर हम डाक मतपत्रों और प्रवासी वोटों को जोड़ दें, तो हम 1996 के आंकड़े को छू सकते हैं या उससे भी आगे निकल सकते हैं। 2019 में निर्वाचन क्षेत्र में 14.43 प्रतिशत वोट पड़े, वहीं 2009 और 2014 के आम चुनावों में यह आंकड़ा लगभग 25 प्रतिशत था।
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श्रीनगर लोकसभा चुनाव
- फोटो : बासित जरगर
पीके पोले ने कहा कि सभी 2135 मतदान केंद्र सीसीटीवी नेटवर्क से जुड़े हैं और ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है जिससे पुनर्मतदान की आवश्यकता पड़े। उन्होंने कहा, हम अभी भी इस मुद्दे पर पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। कहीं से किसी प्रकार की हिंसा की सूचना नहीं है। जो इलाके दहशतगर्दों का गढ़ कहे जाते थे वहां मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं।
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श्रीनगर लोकसभा चुनाव
- फोटो : बासित जरगर
मतदाताओं के उत्साह का आलम यह रहा कि चडूरा, चरार-ए-शरीफ,कंगन, खानसाहिब और शोपियां विधानसभा क्षेत्रों में 45 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। जम्मू-कश्मीर में 2022 के परिसीमन में श्रीनगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का पुनर्निर्धारण किया गया था। इस संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में 18 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं जो श्रीनगर, गांदरबल, पुलवामा, बडगाम और शोपियां के पांच जिलों में फैले हुए हैं। जबकि हब्बा कदल एकमात्र विधानसभा क्षेत्र रहा जहां 20 प्रतिशत से कम सिर्फ 14.01 प्रतिशत मतदान हुआ।
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श्रीनगर लोकसभा चुनाव
- फोटो : डीपीआईआर, जम्मू कश्मीर
इन क्षेत्रों में 2019 की तुलना में 10 गुना से अधिक मतदान
पुलवामा जिले और शोपियां विधानसभा क्षेत्र, जो वर्ष 2019 में अनंतनाग लोकसभा सीट का हिस्सा थे, उस समय वहां 2.5 प्रतिशत से कम मतदान दर्ज किया गया था, लेकिन इस साल यह बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गया। इसी तरह श्रीनगर शहर जो कभी अलगाववादी राजनीति और चुनाव बहिष्कार का गढ़ था - 2019 में 7.69 प्रतिशत से बढ़कर इस बार 25 प्रतिशत से अधिक हो गया है।