श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 11-12 अगस्त को है। वीकेंड लॉकडाउन खत्म होने पर सोमवार को बाजारों में रौनक देखी गई। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण प्रदेश में आम लोगों के लिए मंदिर बंद होने से जन्माष्टमी पर कोई बड़ा धार्मिक कार्यक्रम नहीं होगा। साथ ही शहर में जन्माष्टमी पर शोभायात्रा भी नहीं निकाली जाएगी।
Janmashtami 2020: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 11 और 12 अगस्त को मनाई जाएगी, ऐसे करें पूजा
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श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, लेकिन बहुत बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों एक ही दिन नहीं होते। इस वर्ष भी भगवान श्रीकृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं। मंगलवार 11 अगस्त को सुबह नौ बजकर सात मिनट के बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो 12 अगस्त को सुबह 11 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगी और रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 13 अगस्त को सुबह तीन बजकर 27 मिनट से अगले दिन सुबह पांच बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
मथुरा-वृंदावन 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि जिन लोगों ने स्मार्त संप्रदाय के गुरुओं से दीक्षा ली है वह लोग 11 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत रखें। वहीं जिन लोगों ने वैष्णव संप्रदाय के गुरुओं से दीक्षा ली है वह 12 अगस्त को व्रत रखें।
जन्माष्टमी के दिन पूजा के लिए भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को भी स्थापित किया जाता है। इस दिन उनके बाल रूप के चित्र को स्थापित करने की मान्यता है। पूजा में श्रीगणेश, देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा, लक्ष्मी माता का नाम लेना न भूलें। जन्माष्टमी के दिन बालगोपाल को झूला झुलाया जाता है। शहर में जन्माष्टमी पर कान्हा की मनमोहक झांकियां देखने को मिलती हैं। हालांकि इस बार कोविड के कारण यह झांकियां नहीं निकाली जाएंगी। इस बार कोरोना महामारी के चलते घर पर ही लोग त्योहार मनाएंगे।
शहर में वीकेंड लॉकडाउन के कारण लोग अभी तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए खरीदारी नहीं कर पाए है। बाजारों में बाल गोपाल के लिए रंग-बिरंगे और अलग-अलग आकार के झूले मौजूद हैं। इसके साथ विभिन्न आकार की मूर्तियां भी मौजूद हैं। शहर में सभी प्रमुख मंदिरों को सजाया जा रहा है। जन्माष्टमी पर दिन भर मंदिरों में भजन-कीर्तन होगा, हालांकि इसमें लोगों को प्रवेश नहीं मिलेेगा।