कश्मीर की आबोहवा बदल रही है। आतंक के गढ़ रहे इलाकों से सरहद तक अमन की बयार बहने लगी है। अब सड़कों पर न पत्थरबाज दिखते हैं और न ही राष्ट्र विरोधी प्रदर्शन करने वाले। गांवों-शहरों में सरकारी इमारतों से लेकर सरहद तक तिरंगा फहर रहा है। आतंकवाद को दरकिनार कर युवा पीढ़ी काम धंधे में जुटने लगी है।
जम्मू-कश्मीर: अब नहीं दिखते पत्थरबाज, लद गए पाक-परस्त और देश-विरोधियों के दिन, देखिए तस्वीरें
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श्रीनगर से उत्तरी कश्मीर के बारामुला और उड़ी की ओर जाते पट्टन वैली में हाईवे किनारे सेब के खूबसूरत बागों में लोग काम में मशगूल हैं। कभी आतंक के गढ़ रहे बारामुला में भी माहौल बदला है। पत्थरबाजी के लिए बदनाम यहां के ओल्ड टाउन में अब हुड़दंगी नहीं दिखते हैं। बारामुला के मुज्जफर बताते हैं कि झेलम में बहुत पानी बह चुका है। आतंकवाद से लोगों को कुछ मिला नहीं, सिर्फ तबाही हुई है।
एक साल से यहां अमन है। यहीं दुकान पर बैठे सफेद दाढ़ी वाले व्यक्ति से जब माहौल पर बात की तो उन्होंने सड़क के निचली ओर दफनाए आतंकियों की ओर इशारा कर कहा, हुकूमत का संदेश सबकी समझ में आ रहा है। अब कोई बचाने नहीं आएगा। काम के सिलसिले में उड़ी आए एलओसी से सटे क्षेत्र के ग्रामीण ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कोरोना संकट में सेना उनकी बहुत मदद कर रही है।
उधर, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग और पुलवामा में भी हालात काफी बदल रहे हैं। अनंतनाग के अनीश अहमद का कहना है कि आतंकवाद का यहां भारी नुकसान हुआ है। युवा अब इस रास्ते पर नहीं जाना चाहते। कश्मीर के लोग खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। अनुच्छेद 370 का चंद लोगों ने फायदा उठाया। बदले माहौल में अब सड़कें बनने लगी हैं। विकास के और भी काम शुरू हुए हैं। अनंतनाग के ही तारिक अहमद ने कहा कि हालात सामान्य हो रहे हैं। कुदरत ने हमें जन्नत बख्शी है, लेकिन दहशतगर्दी से घाटी बदनाम हो गई। अब लोगों को सब समझ में आ रहा है। उम्मीद है जल्द ही कश्मीर पर्यटकों से फिर गुलजार होगा।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में काफी कमी आई है। घाटी में साल 2019 में पथराव की 1999 घटनाएं सामने आईं, जबकि 2020 में 255 बार ही पत्थरबाजी हुई। इस साल 2 मई को पुलवामा के डागरपोरा में मुठभेड़ के दौरान आतंकियों को बचाने के लिए लोगों ने पथराव किया। इसके बाद बारपोरा में 12 मई को भी नकाबपोशों ने पथराव किया था। इसके अलावा साल 2021 में पत्थरबाजी की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है। इससे पूर्व 2018 और 2017 में पत्थरबाजी की क्रमश: 1458 और 1412 घटनाएं दर्ज हुईं थीं।