जम्मू संभाग के रियासी जिले के शिवखोड़ी में महाशिवरात्रि पर लगने वाले तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेले का आगाज हो चुका है। डीसी इंदु कंवल चिब ने मेले की शुरुआत करवाई। नौ देवियों की झांकी निकाली गई। इस दौरान पर्यटन विभाग की डिप्टी डायरेक्टर अंबिका बाली के साथ ही एसएसपी रश्मि वजीर भी मौजूद रहीं।
महाशिवरात्रि पर भोले के भक्तों के लिए खास: इस गुफा में होते हैं शिव के दिव्य दर्शन
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शिवखोड़ी गुफा में शिवलिंग और अन्य दुर्लभ मूर्ति स्वरूप में शैलचित्र हैं। यह स्थान शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। इसे भगवान शिव का घर भी कहा जाता है। प्रकृति की गोद में बसी यह एक ऐसी दुर्लभ जगह है, जहां आदिकाल से अब तक भगवान शिव की महिमा बनी हुई है। रनसू से शिवखोड़ी की गुफा करीब 3.5 किलोमीटर दूर है। इस स्थान से बाबा भोलेनाथ की यात्रा प्रारंभ हो जाती है। रनसू से थोड़ा आगे चलने पर लोहे का एक छोटा सा पुल आता है, जो नदी पर बना हुआ है। इस नदी को दूध गंगा कहते हैं। इसका कारण यह है कि महाशिवरात्रि के दिन इस नदी का जल स्वतः ही दूध के समान सफेद हो जाता है।
प्रकृति के वैभव को निहारते हुए आगे चलने पर एक कुंड आता है, जिसे अंजनी कुंड कहते हैं। इस कुंड के पास ही भगवान नीलकंठ की सवारी नंदी बैल के पैरों के निशान हैं। ऐसी मान्यता है कि नंदी बैल इस कुंड में पानी पीने आता था।
हर-हर महादेव, बम-बम भोले, भोले तेरा रूप निराला शिवखोड़ी में डेरा डाला जैसे जयकारों के साथ भक्त आगे बढ़ते रहते हैं। हर कोई उमंग के साथ शिव गुफा को जल्दी से जल्दी छूने के प्रयास में दिखता है। करीब एक किलोमीटर आगे चलने पर लक्ष्मी-गणेश का मंदिर आता है। इस मंदिर के अंदर छोटी सी गुफा में प्राचीन लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति है। इसके बाद जैसे ही भक्तों को गुफा के दर्शन होते हैं, उनके आनंद की अनुभूति कई गुना बढ़ जाती है।
पवित्र गुफा के बाहर हवन कुंड है। गुफा के पास ही जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा चौकी है, जो सुरक्षा की दृष्टि से यात्रियों की तलाशी लेने के बाद ही आगे बढ़ने देती है। गुफा का प्रवेश द्वार करीब 15 से 20 फुट चौड़ा है। गुफा में आगे बढ़ने पर तंग रास्ता है, जिस तरह वैष्णो देवी की प्राचीन गुफा है, उसी प्रकार कहीं लेटकर, कहीं तिरछे होकर, कहीं घुटनों के बल तो कहीं बैठकर जाना पड़ता है।