कश्मीर संभाग के श्रीनगर निवासी तारिक अहमद पतलू ने कोरोना को हराने और डल झील इलाके के लोगों की मदद के लिए एक एंबुलेंस बनाई है। जोकि इन दिनों देश में सुर्खियां बटोर रही है। तारिक ने बताया कि इस शिकारा एंबुलेंस में उन्होंने पीपीई किट, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की सुविधा भी रखी है। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान पेश आने वाली परेशानियों के कारण वह ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित हुए।
बता दें कि डल झील इलाके में एक अच्छी ख़ासी आबादी भी है जो यहां रहती है। लेकिन लोगों को परेशानी का सामना तब करना पड़ता है जब कोई बीमार होता है। ऐसे में झील निवासियों को बड़ी मुश्किल से अपने मरीज़ को शिकारे के सहारे किनारे तक लाना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए तारिक अहमद पतलू ने बीते साल अपने परिवार और दोस्तों की सहायता से डल झील में शिकारा एंबुलेंस सेवा शुरू करने का फैसला किया था।
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शिकारा एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
करीब दो महीने की मेहनत और 12 लाख रुपये की लागत के बाद वह इस शिकारा एंबुलेंस को तैयार कर पाए। उन्होंने बताया कि इससे पहले वर्ष 1865 में झेलम नदी में मरीजों को लाने और ले जाने के लिए एक बोट हुआ करती थी।
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शिकारा एंबुलेंस
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बता दें कि साल 2020 में कोरोना ने कश्मीर में कहर बरपाया था। महामारी की चपेट में तारिक अहमद पतलू भी आ गए थे। कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत वह पहले अपने हाउसबोट में आईसोलेशन में चले गए लेकिन हालत बिगड़ी तो अस्पताल का रुख करना पड़ा।
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शिकारा एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
जब वह अस्पताल से वापस लौटे तो डल झील के किनारे शिकारे वालों ने उन्हें उनकी हाउसबोट तक ले जाने से इनकार किया।
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शिकारा एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
बड़ी मुश्किल से परिवार के सदस्यों ने उन्हें घर तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने शिकारा एंबुलेंस बनाने का निश्चय किया। जोकि वर्तमान में लोगों को काफी मदद पहुंचा रही है।