कश्मीर को जन्नत कहा जाता है। इसी कश्मीर के नाम पर राजनीति करने वाले हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं को भले ही आम कश्मीरी के भविष्य से कुछ लेना देना न हो, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य को लेकर वह काफी सजग हैं। कश्मीरी युवाओं के हाथों में किताबों की जगह बंदूक और पत्थरबाजी को बढ़ावा और स्कूल-कॉलेजों में आग लगाने के लिए उकसाकर वहां के भविष्य को स्कूलों और कॉलेजों से दूर करने वाले 112 अलगाववादी नेताओें के 210 बच्चे विदेशों में अपना भविष्य संवार रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 14 हुर्रियत नेताओं के 21 पुत्र, पुत्रियां, बहनें और बहुएं अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, इरान, तुर्की, मलेशिया और पाकिस्तान में पढ़ रहे हैं या वहां बसकर ऐशो आराम की जिंदगी जी रहे हैं।
कहानी कश्मीर कीः जानिए, आखिर क्यों अलगाववादियों को अपनी संतानों के लिए नहीं सुहाती जन्नत की हवा?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 05 Jun 2020 05:11 PM IST
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