जम्मू कश्मीर रूरल लाइवलीहुड्स मिशन (उम्मीद) द्वारा श्रीनगर की डल झील के किनारे 15-25 मार्च तक चलने वाला एक सरस मेले का आयोजन किया गया है। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से कारीगर अपनी पारम्परिक हस्तकला और हस्तशिल्प को प्रदर्शित कर रहे हैं।
इस मेले में भाग लेने वाले कारीगरों का कहना है कि इससे स्वयं सहायता समूह से जुड़े कारीगरों को अपनी कला को प्रदर्शित करने के लिए प्लेटफार्म मिलता है और वो अपनी कमाई कर सकते हैं। खासकर महिलाएं अपनी आजीविका खुद कमाने में सक्षम हो पाती हैं। ऐसे मेले भविष्य में भी आयोजित किये जाने चाहिए।
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Srinagar Saras Mela
- फोटो : बासित जरगर
सिक्किम की दावा ल्हामु शेर्पा ने कहा कि हमने यहां हैंडलूम के साथ साथ हाथ से बने बैग आदि के साथ साथ हर्बल आइटम यहां शोकेस किये हैं। सिक्किम में जो हमारे स्वयं सहायता समूह जो हैं उनमें जो महिलाएं हैं वो यह सब आइटम बनाती हैं। इससे महिलाओं को काफी सपोर्ट मिल रहा है, सशक्तिकरण हो रहा है। केवल सिक्किम की नहीं बाकी जगहों की महिलाएं भी इससे आत्मनिर्भर बन पा रही हैं और अपना पैसा कमा पा रही है।
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- फोटो : बासित जरगर
बिहार के नवादा ज़िले से आए संजय कुमार ने कहा कि यहां जितने भी स्टेट से लोग आए हैं सबने हस्तकरघा और हस्तशिल प्रोडक्ट लाए हैं। ये जो लोग यह सब सामान बनाते हैं इससे सबका रोज़गार बढ़ता ही जा रहा है और उम्मीद है कि और बढ़ता रहेगा। ऐसे मेलों से कलाकारों को बहुत फायदा मिलता है। हम देश के हर हिस्सों में जाते हैं। इससे पहले जम्मू और नोएडा में भी लगाए गए हैं। ऐसे मेलों से हमें बहुत फायदा होता है तभी कमाई की आशा लगाकर भाग लेने आते हैं। अगर फायदा न हो तो कौन आएगा इन मेलों में।
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- फोटो : बासित जरगर
गौरतलब है कि जेकेआरएलएम के डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि इसमें देश के 9 राज्यों के अलावा जम्मू कश्मीर के हर ज़िले के कारीगरों ने अपने स्टाल लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जो महिलाओं के स्वयं सहायता समूह है उनके द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट और खान-पान को भी वो प्रदर्शित कर रहे हैं और उन्हें यहां बेच रहे हैं।
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- फोटो : बासित जरगर
यह मेला जो है ग्रामीण कारीगरों को अपनी कला को लोगों तक पहुंचाने में सहायता कर रहा है। मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि इस मेले में कुल 75 स्टॉल लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि मेले को अभी एक ही दिन हुआ है शुरू हुए और पहले ही दिन 4.5 लाख की सेल हुई है और उम्मीद है कि आगे और बढ़ेगी।
वहीं इस बीच स्थानीय लोग देश के विभिन्न हिस्सों की हस्तकला और हस्तशिल्प का आनंद ले रहे हैं। एक स्थानीय महिला बिस्मा ने कहा कि मुझे ग्रामीण क्षेत्रों के बने हैंडलूम प्रोडक्ट काफी अच्छे लगते हैं। जैसे ही मुझे पता चला कि यहां ऐसा मेला लगा है तो मैं आज यहां आई। काफी अच्छे आइटम हैं यहां और मुझे काफी अच्छा लगा यहां आके। लोगों को आना चाहिए। इससे कारीगरों का हौंसला भी बढ़ता है और हमें भी अच्छी चीज़ मिल पाती है जो बाज़ारों में दोगुना दामों में बिकती है। यहां अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट अच्छे दामों पर मिलते हैं।