देश को हिला कर रख देने वाले पुलवामा हमले की जांच का चालान नौ महीनों के बाद भी पेश नहीं हो सका है। बेशक इस हमले को अंजाम देने वाले लगभग सभी बड़े आरोपी मारे जा चुके हैं। दो मुख्य आतंकी मुदसर खान और सज्जाद भट्ट भी इसी साल मारे जा चुके हैं। इस हमले की जांच एनआईए को दी गई थी। सूत्रों की अनुसार जल्द ही एनआईए इस मामले को लेकर चालान पेश कर सकती है।
देश को झकझोर देने वाला पुलवामा हमला, नौ महीने बाद सामने आए कई अहम तथ्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बता दें कि 14 फरवरी को फिदायीन आतंकी आदिल अहमद डार ने पुलवामा में सीआरपीएफ के वाहन के साथ अपनी कार को टक्कर मार दी। कार में भारी मात्रा में विस्फोटक था। इसमें 44 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी जैश ए मोहम्मद ने ली थी। इस हमले में शामिल लगभग सभी आतंकी मारे जा चुके हैं।
इस वजह से अब तक पूरी तरह से यह पता नहीं चल पा रहा है कि इस हमले की सही जानकारी क्या थी। इस हमले की रूपरेखा तो पता चल चुकी है लेकिन व्यक्तिगत तौर पर किस शख्स का क्या रोल था, यह अब तक समझ में नहीं आ रहा।
सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच कर रही एनआईए ने इस हमले में कई लोगों की पहचान की है। सात से आठ लोगों की पहचान हो चुकी है। इस हमले में पाकिस्तान और पाकिस्तान में पलने वाले आतंकियों की भूमिका को लेकर एनआईए काम कर रही है। ताकि पाकिस्तान का चेहरा सबके सामने एक बार फिर से लाया जा सके।
इसी तरह से 2016 में पठानकोट में हमला करने वाले चारों आतंकी मारे गए थे। कई महीनों के बाद मामले की जांच में चार्जशीट पेश की गई। जिसमें जैश के एक सरगना मसूद अजहर सहित तीन को मुख्य आरोपी बनाया गया था। दरअसल, जांच एजेंसी को 90 दिन के भीतर चार्जशीट पेश करनी होती है। लेकिन मामले में यदि आरोपियों की मौत हो जाए तो अतिरिक्त वक्त मिलता है।