पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी इफ्तार की तैयारी में जुटे एक परिवार पर कहर बनकर टूटी। दिन भर रोजे का पालन करने वाले इस परिवार का 16 वर्षीय सदस्य गुलफराज अहमद दुनिया से भूखा प्यासा ही रुखसत हो गया। घर के आंगन में गिरे मोर्टार के स्प्लिंटर उसकी छाती में जा घुसे, जिसकी उसकी मौत हो गई। घटना गुरुवार की है, वहीं आज यानी कि शुक्रवार को भी गांव में मातम का माहौल है।
पाकिस्तानी गोलाबारी से इफ्तार भी दुश्वार, रोजा भी न खोल पाया गुलफराज, भूखा-प्यासा ही रुखसत हो गया
गांव के लोगों के अनुसार, मोहम्मद रशीद का बेटा गुलफराज होनहार लड़का था। वह पढ़ाई के साथ एनसीसी एवं अन्य गतिविधियों में भी हमेशा आगे रहता था। गुरुवार शाम करीब सवा सात बजे जब घर के लोग रोजा इफ्तारी की तैयारी कर रहे थे तो गुलफराज अपने घर के बरामदे में रोजा इफ्तार के वक्त का इंतजार कर रहा था। तभी एक पाकिस्तानी मोर्टार बरामदे में आकर फटा। स्प्लिंटर सीधे उसकी छाती में जा घुसा, उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
गोलाबारी को लेकर गांव निवासियों का कहना है कि वैसे तो हमारे लिए दशकों से ही हर समय जंग का माहौल ही बना रहता है लेकिन जबसे जम्मू कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश बना है तब से हर दिन हमारे लिए जंग हो रही है।
हमने सोचा था कि रमजान का मुकदस महीना शुरू होने पर शायद नियंत्रण रेखा पर कुछ समय के लिए गोलाबारी शांत होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहले रमजान से ही पाकिस्तानी सेना की तरफ से हर दिन हमारे गांव को निशाना बनाकर गोलाबारी की जा रही है और आज तो हमारा बच्चा हमसे छीन लिया गया। अब भला हमारे लिए इससे ज्यादा क्या जंग होगी।
वहीं शाम के समय पाकिस्तानी गोलाबारी से डरे सहमे लोग जो भी खाने-पीने का सामान पास होता है, उससे रोजा खोलने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बुधवार को दिन भर रोजा रखने के बाद बनवत डोकरी निवासी मोहम्मद हुसैन के परिवार को इफ्तारी के लिए खाना पकाने का भी मौका नहीं मिला। इसके चलते परिवार ने तरबूज खाकर ही रोजा खोला।