घाटी के अस्थिर हालात और स्थानीय रोड कनेक्टिविटी समेत अन्य सुविधाओं में बढ़ोतरी के चलते मिनी कश्मीर भद्रवाह जम्मू संभाग में सबसे बड़ा पर्यटन स्थल बनकर उभर रहा है। हाल के वर्षों में भद्रवाह जम्मू संभाग के अन्य जिलों समेत दूसरे राज्यों के पर्यटकों की भी पहली पसंद बन रहा है। इसी को देखते हुए आगामी विंटर सीजन के लिए भद्रवाह में अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं।
विंटर सीजन की तैयारी में जुटा ‘मिनी कश्मीर’, जानिए 'नागों की भूमि' भद्रवाह के बारे में अनसुनी बातें
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जम्मू संभाग में वैसे तो सबसे ज्यादा यात्री माता वैष्णो देवी दर्शन को पहुंचते हैं लेकिन कुदरती सौंदर्य के लिहाज से और विशुद्ध पर्यटन स्थल के तौर पर भद्रवाह सबसे बड़ा स्थल बनकर उभरा है। यहां पर्यटकों को बर्फबारी के साथ घुड़सवारी, ट्रैकिंग आदि सुविधाएं आकर्षित करती रही हैं। जम्मू संभाग में पर्यटन स्थल के रूप में भद्रवाह में सबसे अधिक पर्यटक पहुंचे हैं।।
संभाग में 2018 में धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में सबसे अधिक माता वैष्णो के दरबार में 85.95 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, लेकिन पर्यटन स्थल के रूप में भद्रवाह में सबसे अधिक 5.89 लाख पर्यटक पहुंचे थे। भद्रवाह के पांच प्रमुख स्थलों में चिंता वैली, पदरी, जाई वैली, सियोज और बाल पादरी स्थल पर हर साल लाखों पर्यटक पहुंच रहे हैं। इसके अलावा सरतिंगल स्थल भी पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है।
जम्मू से 205 और बटोत से 80 किमी. की दूरी पर भद्रवाह स्थित है। यह नागों की भूमि के नाम से भी विख्यात है। इस इलाके में नागों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। समुद्र तल से 6500 फीट की ऊंचाई पर स्थित चिंता वैली, चिनाब दरिया से जुड़ी हुई है। यहां बगान से थुबा तक घुड़सवारी की जा सकती है।
चिंता वैली में भगवान शिव के कई ऐतिहासिक मंदिर हैं। इसी तरह चंबा सड़क से 40 किमी. दूर पदरी इलाका भी पर्यटकों को लुभा रहा है। यहां पांच मीटर तक बर्फबारी होती है। भद्रवाह से 32 किमी दूर जाई वैली में पर्यटकों का सबसे अधिक जमावड़ा लग रहा है।