पिछले तीन महीने से महबूबा मुफ्ती के ट्विटर अकाउंट पर उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती सक्रिय हैं। अपनी मां महबूबा के ट्विटर अकाउंट के जरिए उन्होंने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा कि भारत सरकार ने चोरों की तरह हमसे लूट की। जो कानूनी तौर पर हमारा हक था उसे छीन लिया गया। इस औपनिवेशिक परियोजना की शुरुआत के तीन महीने हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने लिखा कि अगर सरकार ऐसा सोच रही है कि वह मेरी मां को नजरबंद करके डरा, धमका या चुप करा लेगी तो यह असंभव है।
महबूबा की बेटी ने कहा- सरकार ने चोरों की तरह हमें लूटा, मां को कुछ हुआ तो उसके जिम्मेदार यही होंगे
अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि मैंने अपनी मां के स्वास्थ्य को लेकर कई बार चिंता जाहिर की है। यहां तक कि जिला उपायुक्त श्रीनगर को एक महीने पहले पत्र भी लिखा था। इसके जरिए मैंने उनसे मां को सही स्थान पर स्थानांतरित करने की गुजारिश की थी, लेकिन कोई सुनवाई न हुई। इल्तिजा ने इसके आगे लिखा कि अगर मेरी मां को कुछ हुआ तो उसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
I’ve repeatedly raised concerns about the well being of my mother. I wrote to DC Srinagar a month ago to shift her someplace equipped for the harsh winter. If anything happens to her, the Indian government will be responsible
https://t.co/bgJwi0fHxl— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 5, 2019
Three months since this dictatorial regime started abducting minor boys in Kashmir. It’s time they’re held accountable for the anguish & torment they’ve caused. Tragic irony that the same leaders will celebrate Children’s day a week later. What a farce— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 5, 2019
Delhi cops can take to the streets to oppose attack on a colleague & Maharashtrians can peacefully protest the felling of Aarav trees.But Kashmiris are stripped of the very same rights. Why?— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 5, 2019
वहीं पीडीपी के महासचिव वेद महाजन ने जम्मू-कश्मीर में नजरबंद नेताओं को तत्काल रिहा किए जाने की मांग की और वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था को असंवैधानिक बताया। महाजन ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व खासतौर से पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के खिलाफ बदले की कार्रवाई कर रहा है। महबूबा की मां विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हैं और घर में अकेली रहने को मजबूर हैं। लैंडलाइन सेवा तक उनके घर में बहाल नहीं की गई है।