कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए बढ़ाए गए लॉकडाउन के चलते प्रदेश में सख्ती बरती जा रही है। सड़कों और गलियों में सन्नाटा छाया हुआ है। बिना कारण घरों से बाहर आने वाले लोगों को पुलिस ने लॉकडाउन का पालन करने की सलाह दी। दुकानों पर इक्का-दुक्का लोग सामान खरीदने पहुंचे। अब लॉकडाउन बढ़ने के कारण लोगों को आम जरूरत की चीजों की किल्लत पेश आ रही है। दिहाड़ी मजदूर काफी परेशान हैं।
लॉकडाउन ने मंदा किया धंधा: दिहाड़ी मजदूरों की रुला देने वाली कहानी, झकझोर देंगे ये सवाल
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जरूरी काम करवाने कार्यालय में जाने से भी लोगों को रुकना पड़ रहा है। अब सब्जी बेचने वालों ने भी काम समेट लिया है। सब्जी बेचने वाले गोपाल, हरिया सिंह, रूप सिंह निवासी पलौड़ा ने कहा कि रेहड़ी में सब्जी बेचते थे, लेकिन अब कोई ग्राहक नहीं आ रहा। दिन के समय रेहड़ी का पहरा ही करना पड़ रहा है। सब्जी न बिकने पर हर रोज घाटा हो रहा है।
सब्जी और फल मंडी नरवाल में भी धंधा मंदा हो गया है। कुल तीस फीसदी व्यापार ही हो रहा है। पंजाब से आने वाले सब्जियों के ऑर्डर रद्द करने पड़ रहे हैं। मंडी से सब्जी लेने के लिए कम व्यवसायी आ रहे हैं। इस कारण आढ़तियों का कारोबार काफी मंदा चल रहा है। अब लॉकडाउन अनिश्चितकाल के लिए चलता है तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल कारोबार न होने पर व्यापारियों को भी घरों में ही रहना पड़ रहा है।
लॉकडाउन के कारण छोटे व्यापारियों का पैसा भी डूब गया है। सबसे ज्यादा गन्ने का जूस बेचने वाले, फड़ी, फेरी और आइसक्रीम बेचने वालों का काम प्रभावित हुआ है। शहरवासी अंकुश का कहना है कि वह गन्ने का जूस निकालने का काम करते हैं। हजारों रुपये खर्च कर मशीन खरीदी थी। मार्च में काम ठीक रहा, लेकिन लॉकडाउन के बाद किश्त भरने के लिए भी पैसे नहीं है।
इसी तरह प्रभात सिंह ने बताया कि वह महाराष्ट्र से हैं और जम्मू में फेरी लगाने का काम करते हैं। लॉकडाउन के दौरान भी फेरी लगाने का प्रयास मोहल्लों में किया, लेकिन किसी ने भी सामान नहीं खरीदा। इस कारण काफी परेशानी हो रही है। अब पैसों की कमी से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है।