जम्मू-कश्मीर में रामबन के निहाड़ में फोरलेन राजमार्ग के निर्माण कार्य के दौरान पहाड़ से पस्सियां गिरने पर राष्ट्रीय राजमार्ग करीब 23 घंटे तक बंद रहा। राजमार्ग पर रोके गए वाहनों के चालक व यात्री दिन भर परेशानियों का सामना करने को मजबूर रहे। शाम करीब चार बजे राजमार्ग खुला तो जाम की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद शाम तक राजमार्ग पर जाम लगा रहा। पुलिस को भी यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए दिन भर मशक्कत करनी पड़ी।
जम्मू-कश्मीरः जब पहाड़ों से गिरने लगी आफत, राष्ट्रीय राजमार्ग पर 23 घंटे बेहाल रहे यात्री
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गुरुवार शाम को निहाड़ इलाके में फोरलेन राजमार्ग के निर्माण के दौरान अचानक ही पहाड़ से पस्सियां गिरने लगीं और राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद हो गई। राजमार्ग के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। उधमपुर से भी वाहनों के घाटी की तरफ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। निर्माण कर रही कंपनी ने राजमार्ग को खोलने के लिए मशीनी को लगा दिया। लेकिन रात भर मशक्कत करने के बाद भी शुक्रवार सुबह राजमार्ग नहीं खुल सका।
उधमपुर में रोके गए वाहनों की कतार टिकरी तक पहुंच गई। यात्रियों व चालकों ने रात भी वाहनों के अंदर ही गुजारी। शुक्रवार को सुबह से दोपहर तक वाहनों से बाहर निकल कर राजमार्ग के खुलने का इंतजार करते रहे। शौचालय, पीने के पानी व खाने की सुविधा न मिलने के कारण दिन भर यात्री व चालक परेशान रहे। परेशान यात्री व चालक बार बार पुलिस कर्मियों से राजमार्ग के खुलने के बारे में पूछते रहे। सैकड़ों ट्रकों को पुलिस ने रठियान, बट्टलबालियां, गरनई, टिकरी, मांड में रोक रखा था। सुविधाएं न मिलने के कारण ट्रक चालक भी दिन भर परेशान रहे।
शाम करीब चार बजे मशीनरी को राजमार्ग से पस्सी हटाने में कामयाबी मिली। राजमार्ग के खुलने के बाद पुलिस ने सबसे पहले रामबन व आसपास के इलाकों में वीरवार से फंसे वाहनों को जाने इजाजत दी। अचानक जब सैकड़ों वाहन चलने लगे तो जाम की स्थिति पैदा हो गई और फिर पुलिस को जाम को खुलवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
उधमपुर में रोके गए वाहनों को राजमार्ग के खुलने के काफी समय बाद जाने की अनुमति मिली। राजमार्ग पर जब वाहन चल रहे थे तो बीच बीच में पहाड़ से पत्थर गिरने का सिलसिला जारी था। जब पत्थर गिरते तो पुलिस वाहनों को रोक देती और पत्थरों को हटाने के बाद फिर से चलने की अनुमति दे देती।