ठंडे मरुस्थल और रूखे पहाड़ों के बीच बर्फ के स्तूप बनाकर लाखों लीटर पानी जमा कर लद्दाख के गांव फिर देश दुनिया के लिए मिसाल बने हैं। इस बार इगू गांव ने बेबी ग्लेशियर बनाकर 85 लाख लीटर पानी स्टोर किया है जबकि तरछित ने 83 लाख और फ्यांग ने 63 लाख लीटर क्षमता का कृत्रिम ग्लेशियर तैयार किया है। जल संरक्षण की इस तकनीक के जनक और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक की संस्था आईस स्तूप इंटरनेशनल की ओर से इन गांवों को पांच, तीन और दो लाख रुपये का पुरस्कार दिया है। स्टोंग्दे गांव को स्तूप बनाने के लिए विशेष प्रयासों पर एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया है।
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कृत्रिम ग्लेशियर बनाकर विश्व के लिए मिसाल बना लद्दाख का इगू, थ्री ईडियट्स के असली 'रैंचो' ने दिया पुरस्कार
Tue, 21 Jul 2020 04:48 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 21 Jul 2020 04:48 PM IST
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देश दुनिया के लिए मिसाल बने लद्दाख के गांव
- फोटो : सोशल मीडिया
देश दुनिया के लिए मिसाल बने लद्दाख के गांव
- फोटो : सोशल मीडिया
थ्री ईडियट्स फिल्म के असली रैंचो सोनम वांगचुक ने तरचित गांवों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया है। सोनम के अनुसार लेह से 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तरचित में 30 परिवार रहते हैं। कुदरत के साथ इन लोगाें ने कमाल का समन्वय बनाया है। सूखे पहाड़ों के बीच बसे तरचित गांव ने इस बार 83 लाख लीटर पानी क्षमता का बेबी ग्लेशियर बनाया है।
देश दुनिया के लिए मिसाल बने लद्दाख के गांव
- फोटो : सोशल मीडिया
खास बात है कि इस बार जुलाई माह में भी यह बेबी ग्लेशियर गांव वालों को पानी उपलब्ध करवा रहा है। सोनम ने बताया कि सर्दियों में स्तूप के आकार का कृत्रिम ग्लेशियर बनाया जाता है। गर्मियों में यही कृत्रिम ग्लेशियर इस ठंडे मरुस्थल के बाशिंदों को पानी देते हैं।
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देश दुनिया के लिए मिसाल बने लद्दाख के गांव
- फोटो : सोशल मीडिया
2017 में एक गांव, अब 16 गांव बना रहे कृत्रिम ग्लेशियर
सोनम के अनुसार वर्ष 2017 में फ्यांग गांव से शुरुआत की गई थी। 2018 में 12 गांवों ने बेबी ग्लेशियर बनाए।
सोनम के अनुसार वर्ष 2017 में फ्यांग गांव से शुरुआत की गई थी। 2018 में 12 गांवों ने बेबी ग्लेशियर बनाए।
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देश दुनिया के लिए मिसाल बने लद्दाख के गांव
- फोटो : सोशल मीडिया
वर्ष 2019-20 के लिए लगातार दूसरे वर्ष 16 गांवों ने बर्फ के स्तूप बनाकर जल संरक्षण किया है।
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