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जम्मू कश्मीर: झुग्गियों में कूलर-एसी और एलसीडी, रोहिंग्या बस्ती में मॉल जैसी सेल; रोहिंग्याओं के थे ठाठ

Thu, 17 Sep 2026 10:09 AM IST
अनुज कुमार निखिल मेहता, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
निखिल मेहता, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 17 Sep 2026 10:09 AM IST
सार

नरवाल स्थित अवैध रोहिंग्या बस्ती खाली होने के आदेश के बाद वहां आरामदायक घरेलू सामान बिकता दिखा। इससे साफ पता चलता है कि झुग्गियों में भी रोहिंग्या आरामदायक जीवन जी रहे थे।

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Rohingyas were living a life of luxury even within the Narwal shanties.
रोहिंग्या बस्ती में सामान खरीदते आसपास के लोग - फोटो : संवाद

विस्तार

पंद्रह हजार का एसी, चार हजार का कूलर, 12 हजार की एलसीडी... यह सब किसी मॉल की सेल में नहीं बल्कि जम्मू से वर्षों से अवैध बसी रोहिंग्या बस्ती में बिक रहा है। इससे साफ दिख रहा है कि झुग्गियों में भी रोहिंग्या लग्जरी लाइफ जी रहे थे।

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नरवाल स्थित रोहिंग्या बस्ती खाली करवाने की प्रक्रिया के बीच बुधवार को यहां अलग ही तस्वीर देखने को मिली। जगह खाली करने के आदेश के बाद कई परिवार अपनी झुग्गियां तोड़कर सामान समेटते नजर आए। आसपास की बस्तियों कासिम नगर और राजीव नगर से लोग रोहिंग्याओं से घरेलू सामान खरीदते नजर आए।
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दिनभर बस्ती में खरीद-फरोख्त का सिलसिला चलता रहा। किसी ने चार हजार रुपये में कूलर खरीदा तो किसी ने सात हजार रुपये में फ्रिज लिया। कुछ पंद्रह हजार में रुपये में एसी। छोटे रैक और अन्य सामान की कीमत 200 से 500 रुपये तक रही। सामान की जरूरत और कीमत के हिसाब से लोग मौके पर ही सौदा करते नजर आए। रोहिंग्या बस्ती में रहने वाली रुखसार ने बताया कि उन्हें अचानक जगह खाली करने के लिए कहा गया है।
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नरवाल से झुग्गियां खाली होने के बाद दिनभर बेचते रहे सामान
इतने साल में धीरे-धीरे घर का सामान जुटाया था। वर्ष 2014 से यहां रह रहे हैं और कभी फ्रिज तो कभी कूलर खरीदते रहे। अब अचानक जगह खाली करनी पड़ रही है और इतना सामान साथ ले जाना संभव नहीं है।

कासिम नगर से आई चंपा कुमारी ने बताया कि उन्हें बस्ती खाली होने की जानकारी मिली तो वह फ्रिज और कूलर खरीदने पहुंचीं। उनके साथ आसपास के लोग भी सामान देखने और खरीदने के लिए पहुंचे। यहां देखकर हैरान हो गए कि एसी, एलसीडी भी बिक रहे हैं। 


कुल मिलाकर बात यह है कि इन वर्षों में रोहिंग्याओं ने जम्मू में किसी न किसी माध्यम से पैसा कमाया तभी झुग्गियों में लग्जरी आइटम लग पाईं। सवाल यह भी है कि इन परिवारों को अवैध जानते हुए भी शहरवासियों ने आखिर इन्हें काम क्यों दिया।

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