Kheer Bhawani Mela 2024 : मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुला में खीर भवानी मंदिर में शुक्रवार को मेला आयोजित किया गया है। हर साल ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर इस मंदिर में मेला का आयोजन होता है। शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए। पूजा-अर्चना कश्मीरी पंडितों की वापसी सकुशल वापसी के लिए प्रार्थना की।
रविंद्र रैना ने खीर भवानी मंदिर में टेका माथा
जम्मू कश्मीर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना भी शुक्रवार को खीर भवानी मेले में पहुंचे। उन्होंने मंदिर में माता के दर्शन किए और प्रदेश के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।
इल्तिजा मुफ्ती भी पहुंची खीर भवानी मंदिर
खीर भवानी मेले में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी एवं मीडिया सलाहकार इल्तिजा मुफ्ती भी पहुंची। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज यहां सद्भावना और इंसानियत का संदेश लेकर आई हैं। कश्मीरियत का पैगाम लेकर आई हैं, जो सभी के साथ शांतिपूर्ण ढंग से रहना सिखाती है।
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खीर भवानी मंदिर में आयोजित मेला
- फोटो : बासित जरगर
मेले संग जुड़ी है कश्मीर पंडितों की यादें
खीर भवानी मेले के साथ कश्मीरी पंडितों की कई यादें जुड़ी हुई हैं। इसलिए कश्मीरी पंडितों को इस मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है। देश व विदेशों में बसे कश्मीरी पंडित इस मेले में शामिल होने के लिए हर साल पहुंचते हैं।
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खीर भवानी मंदिर में आयोजित मेला
- फोटो : बासित जरगर
जम्मू से पांच हजार कश्मीरी पंडित पहुंचे हैं घाटी
176 बसों में लगभग 5000 कश्मीर पंडित जम्मू से माता खीर भवानी मंदिर तुलमुला (गांदरबल), टिक्कर (कुपवाड़ा), देवसर और मंजम (कुलगाम), लोग्रीपोरा (अनंतनाग) के विभिन्न गंतव्यों के लिए रवाना हुए हैं। इन सभी जगहों पर माता के मंदिर हैं। मुख्य धर्मसभा 14 जून, 2024 को ज्येष्ठ अष्टमी के शुभ अवसर पर तुलमुला में आयोजित की जा रही है। 15 जून को कश्मीरी पंडित वापस लौटेंगे।
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खीर भवानी मंदिर में आयोजित मेला
- फोटो : बासित जरगर
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
खीर भवानी मेले के निर्बाध और सुरक्षित संचालन के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। गांदरबल जिला प्रशासन ने भी मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों की सुरक्षा के लिए मजबूत ग्रिड स्थापित किया है।
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खीर भवानी मंदिर में आयोजित मेला
- फोटो : बासित जरगर
1912 में हुआ था मंदिर का निर्माण
इस मंदिर का निर्माण 1912 में महाराजा प्रताप सिंह ने कराया था। बाद में महाराजा हरी सिंह ने जीर्णोद्धार कराया। यह कश्मीरी पंडितों का प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि रावण की भक्ति से प्रसन्न होकर मां राज्ञा माता ( खीर भवानी या राग्याना देवी) ने रावण को दर्शन दिए थे। जिसके बाद रावण ने उनकी स्थापना श्रीलंका की कुलदेवी के रूप में की थी। कुछ समय बाद रावण के व्यवहार और बुरे कर्मों के चलते देवी उससे रुष्ट हो गईं और श्रीलंका से जाने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद जब भगवान राम ने रावण का वध कर दिया तो उन्होंने भगवान हनुमान को यह काम दिया कि वह देवी के लिए उनका पसंदीदा स्थान चुनें और स्थापित करें। इस पर देवी ने कश्मीर के तुलमुला को चुना।
माना जाता है कि वनवास के दौरान राम राग्याना माता की आराधना करते थे तो मां राज्ञा माता को रागिनी कुंड में स्थापित किया गया।
कैसे नाम पड़ा खीर भवानी मंदिर
कश्मीर में स्थिति यह देवी का धाम यहां के रहने वाले कई कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी हैं। हर साल ज्येष्ठ माह की अष्टमी तिथि को यहां पर एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। कश्मीरी हिंदू यहां पर रोज देवी की पूजा करते हुए अपनी रक्षा की प्रार्थना करते हैं। देवी दुर्गा के इस मंदिर का नाम खीर भवानी इसलिए प्रचलित हुआ क्योंकि माता को विशेष रूप से खीर का भोग लगाया जाता है। वसंत के मौसम में खीर चढ़ाई जाती है। वहीं यहां के लोग इस मंदिर को महारज्ञा देवी, राज्ञा देवी मंदिर , रजनी देवी मंदिर और राज्ञा भवानी मंदिर के नाम से भी बुलाते हैं।