सुनने की शक्ति खो चुके पीड़ितों के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें सर्जरी के लिए दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। उन्हें शहर के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में ही कोक्लियर इंप्लांट (प्रत्यारोपण) सर्जरी (हियरिंग लास ट्रीटमेंट उपचार और कर्णावत) की सुविधा मिल सकेगी। अस्पताल में एक छह साल के बच्चे की पहली सफल कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी की गई है। सर्जरी के बेहतर परिणाम आए हैं। बच्चा सुनने में सक्षम हो रहा है। अस्पताल के ईएनटी विभाग ने एम्स नई दिल्ली की चिकित्सा टीम के सहयोग से इस सफल सर्जरी को अंजाम दिया है। एसएमजीएस अस्पताल के ईएनटी विभाग के एचओडी डा. प्रमोद कलसोत्रा ने बताया कि उनके पास एक छह साल का बच्चा कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी के लिए आया। उसमें बचपन से ही सुनने की क्षमता नहीं थी। अभिभावकों ने इच्छा जताई की कि वह उन्हें कोक्लियर इंप्लांट उपलब्ध करवाएंगे। इसके बाद डा. कपिल सिक्रा प्रोफेसर ईएनटी विभाग एम्स नई दिल्ली के अलावा स्थानीय टीम में उनके साथ प्रोफेसर डा. पदम सिंह जम्वाल ने एनेथीसिया टीम में एचओडी डा. स्मृति गुलाटी प्रोफेसर, डा. रेणु बाकलू, डा. इशा, नर्सिंग स्टाफ साइमा, निशा, शीतू, थियेटर स्टाफ मैथ्यू, संजीव और फजल की टीम ने छह घंटे की सर्जरी के दौरान बच्चे के दोनों कानों में कोक्लियर इंप्लांट किया।
जम्मू-कश्मीर: कोक्लियर इंप्लांट्स के लिए अब नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली और चंडीगढ़, यहां मिलेगी सुविधा
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बच्चे की गत 17 अगस्त को सर्जरी के बाद मंगलवार को उसके डिवाइज के स्विच को ऑन किया गया। जीएमसी की प्रिंसिपल डा. शशि सूदन की मौजूदगी में बच्चे ने सुनने की क्षमता के लिए बेहतर रिस्पांस दिया। डिवाइस के लिए बच्चे को धीरे-धीरे प्रशिक्षित किया जाएगा।
ईएनटी विभाग भविष्य में भी एम्स नई दिल्ली के मेंटरशिप के तहत कोक्लियर इंप्लांट कार्यक्रम को जारी रखेगा। कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी के लिए इच्छुक ऐसे मरीज ईएनटी विभाग में सोमवार को दोपहर 1 से 4 बजे संपर्क कर सकते हैं।
क्या है हियरिंग लास
हियरिंग लास सुनने की क्षमता में कमी को बताता है। यह सामान्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप हो सकता है। अत्यधिक शोर भी इसके कारणों में से एक हैं। ट्रैफिक शोर, लाउड म्यूजिक, नाइट क्लब का शोर भी इसके कारण हैं। इसके अलावा संक्रमण, कुछ सिंड्रोम, दवाएं, कुछ एंटीबायोटिक्स, एंटीमरल दवाओं का सेवन, सिर में चोट लगना, कान की विकृति या रुकावट, मस्तिष्क में ट्यूमर, शराब और तंबाकू, अधिक कोलेस्ट्राल आदि से हो सकता है।
कैसे काम करता है कोक्लियर इंप्लांट्स
यह एक इलेक्ट्रानिक उपकरण है, जो ध्वनि प्रोसेसर का उपयोग करता है। यह कान के पीछे बाहर की ओर लगाया जाता है। यह प्रोसेसर, ध्वनि संकेतों को पकड़ता है और उन्हें त्वचा के नीचे प्रत्यारोपित रिसीवर के छोर तक पहुंचाता है। रिसीवर से संकेत आंतरिक कान में प्रत्यारोपित इलेक्ट्रोड में जाता है। संकेत फिर आडिटरी नर्व से होती हुई मस्तिष्क तक पहुंचता है। मस्तिष्क को इन संकेतों को पूरी तरह से समझने के लिए समय चाहिए। यह संचार और इस तरह जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है। शिशुओं और बच्चों के लिए अत्यधिक फायदेमंद है। शोर और ध्वनि के बीच अंतर कर पाएंगे।
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