बुधवार को दोनों सदनों में अराजकता का माहौल रहा। अनुच्छेद 370 के मसले पर दोनों सदन पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच लड़ाई का अखाड़ा बन गए। विधानसभा और विधान परिषद में विपक्षी सदस्यों ने माइक तोड़े, फर्नीचर उठाकर फेंका, टेबल पलट दीं और कुर्सियां उछालीं। कागजात फाड़कर लहराए गए।
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- फोटो : AMAR UJALA
विधानसभा में वन मंत्री लाल सिंह और नेकां के दो सदस्यों के बीच हाथापाई की स्थिति पैदा हो गई। मार्शल और संसदीय कार्य मंत्री ए आर वीरी ने बीच बचाव किया।
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इस क्रम में विपक्षी सदस्यों ने मार्शल के साथ भी मारपीट की। चार मार्शल कर्मियों को चोटें आईं। विपक्षी सदस्य मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा अनुच्छेद 370 के विरोधियों को राष्ट्र विरोधी कहे जाने पर और स्पीकर द्वारा उस अंश को कार्यवाही से हटाने के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे थे।
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वे पूरे मामले पर मुख्यमंत्री का सदन में बयान चाहते थे। हंगामे के कारण बजट सत्र को तय अवधि से छह दिन पहले ही समाप्त कर दिया गया। दोनों सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गए।
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विधान परिषद में भी विपक्ष मसले पर चर्चा चाहता था। चेयरपर्सन द्वारा इजजात नहीं मिलने पर विपक्ष का गुस्सा भड़का। विधानसभा में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पीकर से स्पष्टीकरण चाहा कि क्या उन्होंने रिकार्ड चेक कर लिया है और क्या 370 पर मुख्यमंत्री की टिप्पणी को एक्सपंज कर दिया है?