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ग्राउंड जीरो: 12 घंटे तक भारी गोलाबारी, करीब 15 गांवों को पाकिस्तानी सेना ने बनाया निशाना; कई घरों को नुकसान
Sat, 10 May 2025 04:05 PM IST
शाहरुख खान
अमृतपाल सिंह बाली, उड़ी सेक्टर से
अमृतपाल सिंह बाली, उड़ी सेक्टर से
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 10 May 2025 04:05 PM IST
सार
बारामुला के उड़ी में 12 घंटे तक भारी गोलाबारी हुई। करीब 15 गांवों को पाकिस्तानी सेना ने निशाना बनाया। कई घरों को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण अब भी डटे हैं। हर घर में एक पुरुष ने मोर्चा संभाला है।
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गोलाबारी में क्षतिग्रस्त मकान
- फोटो : पीटीआई
सीमावर्ती जिले बारामुला के उड़ी सेक्टर में वीरवार की रात पाकिस्तान ने फिर नापाक हरकत करते हुए करीब 15 गांवों में भारी गोलाबारी की। 12 घंटे चली इस गोलाबारी में भले ही कोई जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन कई घरों को भारी क्षति पहुंची। पाकिस्तान की इस दुस्साहसिक हरकत ने एक बार फिर उसकी बौखलाहट और कायरता को उजागर किया है। मोहरा, सलामबाद और गिंगल समेत कई गांवों में रातभर दहशत का माहौल रहा।
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उड़ी में लोग छोड़ रहे हैं घर
- फोटो : बसित जरगर
सेना हर स्थिति के लिए तैयार
पाकिस्तान का यह दुस्साहस एलओसी के करीब गिंगल, चुरुवा, सलामबाद, दछना, सिलिकूट, लगामा, लच्छीपोरा गरकोट, धऊल, मुथल, तोरना, रुस्तम, कमलकोट, उरूसा और सालाकोट जैसे गांवों में भी दिख, जहां भारतीय नागरिकों ने संयम और साहस से मुकाबला किया। गिंगल के अब्दुल अजीज भट्टी ने कहा कि पाकिस्तान ने जानबूझकर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया, जिससे आम नागरिकों में डर पैदा हो, लेकिन भारतीयों का हौसला अडिग है। कई लोगों ने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, जबकि घर के पुरुष सुरक्षा में डटे रहे। पूरे इलाके में भारतीय सेना सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
पाकिस्तान का यह दुस्साहस एलओसी के करीब गिंगल, चुरुवा, सलामबाद, दछना, सिलिकूट, लगामा, लच्छीपोरा गरकोट, धऊल, मुथल, तोरना, रुस्तम, कमलकोट, उरूसा और सालाकोट जैसे गांवों में भी दिख, जहां भारतीय नागरिकों ने संयम और साहस से मुकाबला किया। गिंगल के अब्दुल अजीज भट्टी ने कहा कि पाकिस्तान ने जानबूझकर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया, जिससे आम नागरिकों में डर पैदा हो, लेकिन भारतीयों का हौसला अडिग है। कई लोगों ने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, जबकि घर के पुरुष सुरक्षा में डटे रहे। पूरे इलाके में भारतीय सेना सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
गोलीबारी के बाद सुरक्षित स्थान की ओर जाते लोग
- फोटो : संवाद
तंगधार : आधे से ज्यादा सुरक्षित ठिकानों पर, बाकी की रातें बंकरों में कट रहीं
अजीम यूसुफ, कुपवाड़ा के तंगधार से
एलओसी पार के आतंकी शिविरों पर हमले से पाकिस्तानी सेना बौखलाई हुई है। सामरिक क्षेत्रों में हमले विफल हो रहे हैं तो पाकिस्तानी सेना नागरिक इलाकों को निशाना बना रही है। लगातार तीसरे दिन वीरवार रात भी तंगधार के त्रिबुनि, शमसपोरा, बागबेला, दिलदार, भटपोरा, नवगावरा आदि गांवों में पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की। इससे मकानों, दुकानों संपत्तियों और वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा है। हमले के कारण आधे से अधिक लोग पहले ही घर खाली कर चले गए हैं। बाकी बचे लोगों की रात बंकरों में कट रही है। यहां के आदिल भट ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद से ही छिटपुट गोलीबारी चल रही थी। मंगलवार रात से भारी गोलाबारी हर रात की जा रही है। बंकर में रह रहीं स्थानीय निवासी शबनम ने बताया कि कई वर्षों से यहां रह रहे थे। बड़ी मेहनत से अपने सपनों का घर बनाया था।
अजीम यूसुफ, कुपवाड़ा के तंगधार से
एलओसी पार के आतंकी शिविरों पर हमले से पाकिस्तानी सेना बौखलाई हुई है। सामरिक क्षेत्रों में हमले विफल हो रहे हैं तो पाकिस्तानी सेना नागरिक इलाकों को निशाना बना रही है। लगातार तीसरे दिन वीरवार रात भी तंगधार के त्रिबुनि, शमसपोरा, बागबेला, दिलदार, भटपोरा, नवगावरा आदि गांवों में पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की। इससे मकानों, दुकानों संपत्तियों और वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा है। हमले के कारण आधे से अधिक लोग पहले ही घर खाली कर चले गए हैं। बाकी बचे लोगों की रात बंकरों में कट रही है। यहां के आदिल भट ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद से ही छिटपुट गोलीबारी चल रही थी। मंगलवार रात से भारी गोलाबारी हर रात की जा रही है। बंकर में रह रहीं स्थानीय निवासी शबनम ने बताया कि कई वर्षों से यहां रह रहे थे। बड़ी मेहनत से अपने सपनों का घर बनाया था।
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गोलीबारी के बाद सुरक्षित स्थान की ओर जाते लोग
- फोटो : संवाद
ज्यौड़ियां : सीमावर्ती लोगों में डर नहीं... पर सतर्क
कुलवीर सिंह, छंब ज्यौड़ियां से
भारत-पाकिस्तान में तनातनी के बीच सीमावर्ती गांवों के लोग सतर्क हैं। लोग वीरवार शाम को घरों को ताला लगा सुरक्षित ठौर पर पहुंच गए। सुबह घर लौटे पलांवाला के नवीन सिंह और निधि चौधरी ने बताया कि वे रिश्तेदार के घर चले गए थे। घर में मवेशी भी हैं, उनको भी चारा-पानी डालना है। शाम ढलने से पहले फिर सुरक्षित स्थान पर निकल जाएंगे। सीमावर्ती सभी गांवों के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए खौड़ प्रशासन की तरफ से 18 केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर शाम को लोग पहुंच जाते हैं। बीती रात पाकिस्तानी हमले के बाद भी खौड़ और ज्यौड़ियां के बाजार खुले देखे गए। यह बात अलग है कि रौनक नहीं थी। खौड़ बाजार के दुकानदार बिल्लू साह और दीपक सिंह बताते हैं कि सुराक्षा जरूरी है। इसलिए सभी अपने परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेज रहे हैं।
सुरक्षाबल चौकस... गश्त बढ़ी
सुरक्षाबलों को उच्च सतर्कता पर रखा गया है। सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए मांग की है कि जब तक सीमा क्षेत्र में पूर्ण शांति स्थापित नहीं हो जाती तब तक इन सुरक्षा उपायों को जारी रखा जाए।
कुलवीर सिंह, छंब ज्यौड़ियां से
भारत-पाकिस्तान में तनातनी के बीच सीमावर्ती गांवों के लोग सतर्क हैं। लोग वीरवार शाम को घरों को ताला लगा सुरक्षित ठौर पर पहुंच गए। सुबह घर लौटे पलांवाला के नवीन सिंह और निधि चौधरी ने बताया कि वे रिश्तेदार के घर चले गए थे। घर में मवेशी भी हैं, उनको भी चारा-पानी डालना है। शाम ढलने से पहले फिर सुरक्षित स्थान पर निकल जाएंगे। सीमावर्ती सभी गांवों के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए खौड़ प्रशासन की तरफ से 18 केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर शाम को लोग पहुंच जाते हैं। बीती रात पाकिस्तानी हमले के बाद भी खौड़ और ज्यौड़ियां के बाजार खुले देखे गए। यह बात अलग है कि रौनक नहीं थी। खौड़ बाजार के दुकानदार बिल्लू साह और दीपक सिंह बताते हैं कि सुराक्षा जरूरी है। इसलिए सभी अपने परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेज रहे हैं।
सुरक्षाबल चौकस... गश्त बढ़ी
सुरक्षाबलों को उच्च सतर्कता पर रखा गया है। सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए मांग की है कि जब तक सीमा क्षेत्र में पूर्ण शांति स्थापित नहीं हो जाती तब तक इन सुरक्षा उपायों को जारी रखा जाए।
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गोलाबारी में क्षतिग्रस्त मकान
- फोटो : संवाद
शांत रहा रामगढ़...
राजन चौधरी, रामगढ़ से
पिछले दो दिनों से प्रशासन सीमावर्ती गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज रहा है। रामबढ़ के लोगों का कहना है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जम्मू में फायरिंग हुई, लेकिन रामगढ़ क्षेत्र अभी शांत है। जब भी ऐसा माहौल बनता था, तो हमारे क्षेत्र में सबसे पहले गोलाबारी शुरू होती थी। प्रेमपाल चौधरी ने कहा कि गांव में फायरिंग बिल्कुल नहीं हुई है, हालांकि पूरी रात सीमा से गोलाबारी की आवाज सुनाई देती रही। परिवार को रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। गोलीबारी शुरू होने पर डर है, लेकिन मजबूरी मवेशियों की है। सीमा पर बसे हर गांव में एक-एक आदमी मवेशियों की देखभाल के लिए घरों में रुका है। सभी गांवों को प्रशासन शाम होते ही खाली करवा रहा है। ग्रामीणों को बसों से शिविरों में भेजा जा रहा है।
राजन चौधरी, रामगढ़ से
पिछले दो दिनों से प्रशासन सीमावर्ती गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज रहा है। रामबढ़ के लोगों का कहना है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जम्मू में फायरिंग हुई, लेकिन रामगढ़ क्षेत्र अभी शांत है। जब भी ऐसा माहौल बनता था, तो हमारे क्षेत्र में सबसे पहले गोलाबारी शुरू होती थी। प्रेमपाल चौधरी ने कहा कि गांव में फायरिंग बिल्कुल नहीं हुई है, हालांकि पूरी रात सीमा से गोलाबारी की आवाज सुनाई देती रही। परिवार को रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। गोलीबारी शुरू होने पर डर है, लेकिन मजबूरी मवेशियों की है। सीमा पर बसे हर गांव में एक-एक आदमी मवेशियों की देखभाल के लिए घरों में रुका है। सभी गांवों को प्रशासन शाम होते ही खाली करवा रहा है। ग्रामीणों को बसों से शिविरों में भेजा जा रहा है।