दिसंबर, 1971 में पाकिस्तानी सेना पर भारतीय सशस्त्र बलों की निर्णायक और ऐतिहासिक जीत की स्मृति में दिल्ली से रवाना हुई स्वर्णिम विजय मशाल तुरतुक और त्याक्षी गांव पहुंची। 1971 के युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देकर स्वर्णिम विजय वर्ष मनाया जा रहा है। इस समारोह में सैनिकों, दिग्गजों, स्थानीय लोगों और तुरतुक और त्याक्षी गांवों के स्कूली बच्चों ने बड़े जोश और उत्साह के साथ स्वर्णिम विजय मशाल का स्वागत की। स्कूली बच्चों द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हुए स्वर्णमि विजय मशाल का भव्य सांस्कृतिक रूप से स्वागत किया गया। 1971 के युद्ध के दौरान अवैध पाकिस्तानी कब्जे से मुक्त होने के बाद से तुरतुक और त्याक्षी गांव का ऐतिहासिक महत्व है। इस क्षेत्र ने तब से तेजी से आर्थिक और सामाजिक विकास देखा है और लद्दाख के शीर्ष पर्यटन स्थल के रूप में भी उभरा है।
स्वर्णिम विजय मशाल: 1971 के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, मशाल का हुआ भव्य स्वागत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Wed, 04 Aug 2021 01:38 PM IST
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