फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

तीस साल बाद भी कश्मीरी पंडितों ने नहीं किया कश्मीरियत को खुद से अलग, देखिए तस्वीरें

Fri, 19 Mar 2021 11:35 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Fri, 19 Mar 2021 11:35 AM IST
विज्ञापन
Even after thirty years of time Kashmiri Pandits, did not let their Kashmiriyat to separate from themselves
जगती में आयोजित कश्मीरी पंडितों का कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला

चारों ओर खुशनुमा माहौल, अपनों के बीच चहल-पहल, चेहरों पर उमंग और उत्साह। मौका था जगती टाउनशिप में शुरू हुए कश्मीरी पंडित फूड, कल्चर व क्राफ्ट उत्सव का। कश्मीरी पंडितों ने दिखाया कि तीस साल के आतंकवाद और अन्य विकट परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी कश्मीरियत को खुद से अलग नहीं किया है। वही हसीन वादियों वाली संस्कृति और विरासत की बखूबी झलक दिखी। खासतौर पर उत्सव में विरासती बर्तनों को देखकर पंडितों को अपनों की याद आ गई। इन बर्तनों की नक्काशी में उनकी संस्कृति छिपी हुई थी। उत्सव में पंडितों के शादी समारोह से लेकर वटुक पूजा की आस्था दिखाई गई।








 

Trending Videos
Even after thirty years of time Kashmiri Pandits, did not let their Kashmiriyat to separate from themselves
जगती में आयोजित कश्मीरी पंडितों का कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला

जगती के लेन 14 स्थित सामुदायिक हाल में हुए उत्सव में कश्मीरी बर्तनों और उनकी संस्कृति से जुड़ी चित्रकारी प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें कई ऐसे प्रमुख बर्तन रखे गए थे जो कश्मीर में उनकी जीवनचर्या और जीवन से जुड़े रहे। संध्या चोग से पंडित संध्या में चिराग जलाते थे।

Even after thirty years of time Kashmiri Pandits, did not let their Kashmiriyat to separate from themselves
जगती में आयोजित कश्मीरी पंडितों का कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला

इसी तरह कांज को मसाले कूटने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सामावार पंडितों के घरों में चाय और काहवा बनाने के लिए प्रमुख और विरासती बर्तन रहा है। खोस में चाय डालकर दी जाती है। पंडितों के प्रमुख त्योहार महाशिवरात्रि की वटुक पूजा की सामग्री को भी दर्शाया गया था। शिवरात्रि पर पंडित समुदाय के घरों में कई दिन तक वटुक पूजा की जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Even after thirty years of time Kashmiri Pandits, did not let their Kashmiriyat to separate from themselves
जगती में आयोजित कश्मीरी पंडितों का कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला

इसके अलावा मानन माल और टिकटाल में पंडितों के घरों में महिलाओं द्वारा श्रृंगार की सामग्री को प्रदर्शित किया गया। इसी तरह तुंबक नार पारंपरिक वाद्य यंत्र शादी समारोह में बजाए जाते हैं। कश्मीर में अधिकांश ठंड का जीवन व्यतीत करने वाले पंडित समुदाय में जजीर यानी हुक्का भी प्रमुख भूमिका निभाता रहा है।

विज्ञापन
Even after thirty years of time Kashmiri Pandits, did not let their Kashmiriyat to separate from themselves
जगती में आयोजित कश्मीरी पंडितों का कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला

वहीं कांगड़ी भी पंडितों के जीवन से जुड़ी रही है। इसके अलावा चित्रकारी में कश्मीरी पंडितों की संस्कृति और देवी देवताओं को दर्शाया गया।

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर : रोहिंग्याओं के पास मिले फर्जी पासपोर्ट, आतंकवाद के साथ हो सकता है संबंध

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed