मोबाइल गेम का किरदार बन एक 13 साल का बच्चा घर से निकल गया। बच्चे के लापता होने पर पूरे इलाके में सनसनी मच गई। शिकायत पर पुलिस ने हीरानगर में दयालाचक के रहने वाले बच्चे को लापता होने के साढ़े पांच घंटे बाद कठुआ के सकताचक इलाके में हाईवे पर पकड़ा। पूछताछ में पता चला कि यह बच्चा मोबाइल गेम जीटीए वाइस सिटी के किरदार माइकल के टास्क पूरे करने निकला था। चौंकाने वाली बात है कि बच्चे ने रास्ते में साइकिल भी ली और टास्क के तहत एनर्जी बढ़ाने के लिए चिप्स भी खाए। कहानी में यह खेल किरदार को मौत के मुंह में ले जा सकता है।
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जम्मू-कश्मीरः मोबाइल गेम का किरदार बन टास्क पूरा करने घर से निकल गया बच्चा, ...और फिर
Sun, 07 Feb 2021 02:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हीरानगर
अमर उजाला नेटवर्क, हीरानगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 07 Feb 2021 02:13 AM IST
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- फोटो : PUBG
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- फोटो : Pubg Mobile
पुलिस के अनुसार दयालाचक से 13 साल का बच्चा सुबह आठ बजे घर से दही लेने निकला था। वापस नहीं आया तो घरवालों ने पुलिस को सूचित किया। बच्चे को ढूंढने के लिए दो टीमें गठित की गईं। आखिरकार इस बच्चे को सकताचक के पास हाईवे पर दोपहर करीब 1.30 खोज लिया गया।एसडीपीओ बॉर्डर सचित महाजन ने बताया कि बच्चा जीटीए वाइस सिटी नाम की गेम का आदि हो चुका था। वह उस गेम के एक किरदार माइकल को निभाने के लिए घर से निकला।
PUBG MOBILE (सांकेतिक)
- फोटो : amar ujala
उसने चड़वाल में जिम के सामने से एक साइकिल भी ली। खेल में बताए मिशन के तहत उसने एनर्जी लो होने पर रिफ्रेंशमेंट के तौर पर रास्ते में खरीदकर चिप्स भी खाए। एसडीपीओ के अनुसार सुबह 10.30 बजे बच्चे के लापता होने की सूचना मिली थी।
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पुलिस ने बच्चे को किसी अनहोनी से पहले ही सकताचक के पास से ढूंढ लिया। बच्चे को बाद में परिजनों के हवाले कर दिया गया। एसडीपीओ ने कहा कि अभिभावक बच्चों के स्क्रीन टाइम और उस पर वह क्या देख रहे हैं, इस पर नजर रखें।
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पिछले एक वर्ष से पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत बढ़ गया है। इस पर अभिभावक यदि बच्चों पर नजर नहीं रख रहे तो आभासी दुनिया की आदत घातक सिद्ध हो सकती है। घर में ही रहने और गेम की लत में बच्चे बाकी लोगों से मिलना जुलना कम कर देते हैं। वे मोबाइल गेम से इतना जुड़ जाते हैं कि खुद को भी उसका हिस्सा मानने लगते हैं। गेम में मिलने वाले निर्देश बच्चे असल जिंदगी समझने लगते हैं। अभिभावकों को गंभीरता के साथ स्क्रीन टाइम की निगरानी करनी चाहिए।
-डॉ मुकुल उब्बट, जिला मेंटल हेल्थ प्रोग्राम अधिकारी
-डॉ मुकुल उब्बट, जिला मेंटल हेल्थ प्रोग्राम अधिकारी