कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लद्दाख के कारगिल जिले के लातू गांव के लोगों ने नई पहल की है। ग्रामीणों ने गांव के प्रवेश द्वार पर नोटिस चिपका दिए हैं कि कोई भी बिना हाथ धोए गांव में प्रवेश न करे। इस पहल की प्रशासन ने भी सराहना की है। कारगिल टाउन से करीब 25 किलोमीटर दूर एलओसी के करीब बसे लातू गांव में करीब 45 घर हैं।
कोरोना ऐसे लड़ रहे लोगः बिना हाथ धोए गांव में प्रवेश नहीं, बच्चे की दी हुई रकम दुनिया के लिए नजीर
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बता दें कि लद्दाख में 13 मामले पॉजिटिव आए हैं, जिनमें 2 कारगिल के हैं। इसके बाद से कारगिल जिले के करीब 148 लोगों को अलग-अलग एकांतवास केंद्रों में रखा गया है जबकि 127 को घर पर एकांतवास में रहने की सलाह दी गई है। कारगिल के जिला उपायुक्त बसीरुल हक चौधरी ने गांव वालों की इस पहल को बाकी गांवों के लिए एक रोल मॉडल बताया है। चौधरी ने ट्वीट में लिखा...लातू गांव रोल मॉडल। इस पहल के साथ कई और गांव भी जुड़ेंगे।
स्थानीय निवासी मुदसिर अहमद ने बताया कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर गांव के लोगों ने एक कमेटी गठित की। इसमें फैसला लिया गया कि अगर गांव को कोरोना से बचाना है तो किसी को बिना हाथ धोए अंदर नहीं आने देना है चाहे वह बाहर वाला हो या फिर गांव का ही हो।
यही नहीं इस फैसले को सुनिश्चित बनाने के लिए गांव के युवा अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं। मुदसिर के अनुसार गांव की शुरुआत में ही पत्थरों पर और वहां बनी पानी की टंकी पर इस संबंधी संदेश भी लगा दिए गए हैं। हाथ धोने के लिए साबुन, हैंड सेनिटाइजर, आदि सामान भी रख दिया है।
कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में कारगिल के एक नौ वर्षीय बच्चे मोहम्मद कुमेल ने रेडक्रॉस सोसायटी के रिलीफ फंड में 3000 रुपए दान किए हैं। मोहम्मद कुमेल कारगिल के जीएम पोर का रहने वाला है। कुमेल के इस जज्बे की डीसी बसीरुल हक चौधरी ने भी सराहना की। ट्वीट कर लिखा...टाइगर मोहम्मद कुमेल को सलाम। कुमेल द्वारा दी गई रकम देश के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है।