कोरोना के चलते लागू लॉकडाउन ने दो महीने में लोगों की जीवन शैली को बदल दिया है। घर पर ही परिवार के सदस्य एक दूसरे के बाल तक काट रहे हैं। लजीज व्यंजन बना रहे हैं। पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। सामाजिक मेलजोल को अच्छा बताने वाले अब सोशल डिस्टेंसिंग और सामाजिक तौर पर खुद को अलग-थलग रखने को ज्यादा बेहतर बता रहे हैं। बार-बार हाथ धोने की एक नई आदत भी लाइफ स्टाइल में शुमार हो गई है।
इतना बदल गया इंसान! कोरोना से जंग में लॉकडाउन ने बदल दी जीवन शैली, इन्होंने साझा किए अनुभव
पेशे से शिक्षिका नानक नगर की राधिका शर्मा ट्रेंड नाई की तरह अपने बच्चे आहान के बाल काट रही थीं। पूछने पर उन्होंने बताया कि नाई की दुकानें बंद हैं। खुल भी जाएं तो भी वह तब तक बच्चों को नाई की दुकान में बाल कटवाने नहीं भेजेंगी जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता। कोरोना वायरस का खतरा ऐसी जगहों पर ज्यादा रहेगा।
उन्होंने जीवन में पहले कभी किसी के बाल नहीं काटे और न ही प्रशिक्षण लिया लेकिन जब जीवन शैली बदल ही गई है तो इसे भी आजमा लिया। बच्चे के बालों की तरफ देखकर बोलीं-अच्छे कटे हैं।
पिता के साथ छत पर क्रिकेट खेल रहे 12 साल के साहिल गुप्ता ने कहा कि वह पिछले दो महीने से घर के बाहर नहीं निकले हैं। माता-पिता बाजार से सामान ले आते हैं। वह और उनकी बहन घर पर ही ऑनलाइन माध्यम से पढ़ती है। सुबह और शाम को वह घर पर ही खेलते हैं। माता-पिता उनका साथ देते हैं। घर से बाहर निकलने का मन तो करता है लेकिन कोरोना वायरस से बचाव भी जरूरी है।
पेशे से बैंक कर्मी आरती शर्मा एक हलवाई की तरह घर में समोसे बना रही थीं। उन्होंने कहा कि दो महीने में समोसे बनाने से लेकर गुलाब जामुन, पिज्जा, केक आदि बनाना भी सीख लिया है। जीवन शैली में पिछले दो महीनों में बहुत तेजी से बदलाव हुए हैं। इन बदलावों को अपनाकर ही आगे बढ़ा जा सकता है।