मचैल यात्रियों तक सुविधाएं पहुंचाने की होड़ में मौत करीब आई है। पहले यात्री 40 किलोमीटर पैदल चलते थे। अब केवल साढ़े आठ किलोमीटर का पैदल ट्रैक रह गया है। सड़क बनाने की होड़ में पहाड़ों में विस्फोट किए गए। पेड़ों को काटा गया। इससे जलवायु परिवर्तन हुआ। नतीजा यह हुआ कि कम समय में ज्यादा बारिश हो रही है। बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं।
किश्तवाड़ में तबाही के पीछे ये सब : पहले 40 KM पैदल चलते थे, अब केवल 8.5 KM का ट्रैक; इस होड़ में करीब आई मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: विकास कुमार
Updated Fri, 15 Aug 2025 12:55 AM IST
सार
क्लस्टर यूनिवर्सिटी जम्मू की को-ऑर्डिनेटर सुगंधा महाजन के अनुसार मचैल यात्रा का पूरा क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। ग्लेशियरों का पिघलना बढ़ गया है। पहाड़ों में विस्फोट से इनकी सहनशक्ति बेहद कम हो गई है।
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