नियंत्रण रेखा पर बसे गांवों के लोगों की जिंदगी आसान नहीं होती। यहां किसानों को फसल लगाना और उसकी कटाई करना दोनों जान को दांव पर लगाकर ही होता है। कोरोना काल में यह काम और कठिन हो गया है। एलओसी से सटे इलाके में गेहूं की फसल लहलहा रही है परंतु उसे काटने के लिए ग्रामीणों को रात का इंतजार करना पड़ रहा है। दिन में ग्रामीणों को सीमापार से होने वाली गोलाबारी का खतरा हमेशा बना रहता है। यही कारण है कि आजकल ग्रामीण गेहूं की कटाई रात में करने को मजबूर हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः किसान ने कहा- जहरीले जीव-जंतुओं से बड़ा खतरा पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी है
नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना की अग्रिम चौकियों से करीब ढाई सौ मीटर दूर बसे गांव जलास सलोत्री में आजकल रात के समय किसानों को परिवार के साथ फसल काटते देखा जा सकता है। कटाई के काम में जुटे किसान मंगतराम, सुमित कुमार, शुभम बाली और अश्विनी शर्मा का कहना है कि अगर हम लोग दिन में खेतों में काम के लिए आते हैं तो पाकिस्तानी सेना गोलाबारी शुरू कर देती है। हमें कटाई बीच में ही छोड़कर जान बचाकर भागना पड़ता है।
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नियंत्रण रेखा पर बसे गांव
- फोटो : सोशल मीडिया
किसानों ने कहा कि एक तरफ कोरोना महामारी और दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी ने हमें परेशान कर रखा है। रात को कटाई में भी मुश्किलें कम नहीं हैं। सांप और दूसरे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। सबसे बड़ा खतरा पाकिस्तानी सेना की तरफ से की जाने वाली गोलाबारी है। पहले भी कई बार खेतों में काम करते वक्त कई किसान जान गंवा चुके हैं।
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नियंत्रण रेखा
- फोटो : सोशल मीडिया
किसानों के मुताबिक इस बार हमारी गेहूं की फसल अच्छी हुई है। रात को मौका मिलते ही कटाई कर रहे हैं, ताकि मेहनत के कुछ दाने घरों तक पहुंच जाएं और रोजी-रोटी का जुगाड़ हो जाए। किसानों ने कहा कि दिन में खेतों में जरा सी हरकत होने पर पाकिस्तानी सेना मोर्टार और मशीनगनों से गोलाबारी शुरू कर देती है। रात में हम उन्हें नजर नहीं आते हैं, इसलिए गोलाबारी का डर नहीं होता।
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पाकिस्तानी गोलाबारी में क्षतिग्रस्त मकान
- फोटो : अमर उजाला
फसल की कटाई के दौरान किसी भी तरह की रोशनी का प्रयोग नहीं करते। आपस में बात करनी हो तो वह भी धीमे स्वर में करते हैं। नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि सरकार की तरफ से हमें कई प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। समय पर खाद, बीज आदि उपलब्ध कराया जाता है लेकिन पाकिस्तानी गोलाबारी हमारे लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है।