जम्मू-कश्मीर के आखिरी डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह की 122वीं जयंती पर शुक्रवार को विभिन्न स्थानों पर हुए कार्यक्रमों में उन्हें याद किया गया।
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- फोटो : Amar Ujala
भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय में महाराज की अहम भूमिका रही। वह पाकिस्तान के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय के प्रस्ताव के सख्त खिलाफ थे।
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युवा राजपूत सभा की ओर से बन तालाब से शोभा यात्रा को मोटरसाइकिल/कार रैली की शक्ल में रवाना किया गया जो चिनौर, जानीपुर, न्यूप्लाट, अंबफला, पंजतीर्थी, कच्ची छावनी, परेड, शालामार, इंदिरा चौक, गुम्मट से होती हुई तवी पुल पर स्थित महाराज के प्रतिमा स्थल पर संपन्न हुई। इस दौरान राजपूत सहित अन्य वर्ग के लोगों ने महाराज की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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इस दौरान राजपूत सहित अन्य वर्ग के लोगों ने महाराज की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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रैली में युवाओं ने हथियारों के साथ शक्ति प्रदर्शन भी किया। महाराज की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए। सदस्यों ने महाराज हरि सिंह अमर रहे के जयघोष लगाए। सभा के प्रधान सुरेंद्र सिंह ने राजपूत वेलफेयर बोर्ड स्थापित करने के साथ 23 सितंबर को उनकी जयंती पर अवकाश घोषित करने की मांग की।